Honeymoon मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, सोनम की बेल कैंसिल

Update: 2026-07-23 08:35 GMT

नई दिल्ली : इंदौर के चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने सोनम को मिली जमानत को रद्द करते हुए उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि मामले की सुनवाई में लंबे समय तक देरी होती है तो सोनम छह महीने बाद दोबारा जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकती हैं।

सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस आदेश के बाद अब सोनम को फिर से जेल जाना पड़ सकता है।

राजा रघुवंशी हत्याकांड देशभर में चर्चा का विषय बना था। इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी की हत्या उस समय हुई थी, जब वह अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे। इस मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए थे और सोनम समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच एजेंसियों ने मामले में आरोप पत्र भी दाखिल किया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने उनकी जमानत का पक्ष रखते हुए कई दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अभी तक केवल चार गवाहों के बयान दर्ज हो पाए हैं। वकील ने कहा कि मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और सोनम को पहले जमानत देते समय अदालत ने कई सख्त शर्तें लगाई थीं।

सोनम के वकील ने यह भी कहा कि जमानत मिलने के बाद उन्होंने अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन किया है। उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है और वह जांच प्रक्रिया में सहयोग कर रही हैं। उन्होंने अदालत से जमानत बरकरार रखने की अपील की।

सुनवाई के दौरान सोनम की गिरफ्तारी को लेकर भी चर्चा हुई। सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। उनके पक्ष की ओर से कहा गया कि उनकी गिरफ्तारी को लेकर भ्रम की स्थिति है और इसे सरेंडर बताया जा रहा है। वहीं, मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ने खुद आत्मसमर्पण किया था और इसका उल्लेख चार्जशीट में भी किया गया है।

तुषार मेहता ने अदालत के सामने कहा कि सोनम की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपों को देखते हुए जमानत रद्द किया जाना उचित है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को रद्द कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी राहत दी कि यदि मुकदमे की सुनवाई समय पर आगे नहीं बढ़ती है और देरी होती है तो छह महीने बाद वह दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकती हैं।

राजा रघुवंशी हत्याकांड में आगे की कानूनी प्रक्रिया अब फिर से तेज होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष की नजरें आगामी सुनवाई पर रहेंगी। इस मामले में बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं, जिसके बाद अदालत में मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोनम रघुवंशी को निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। यह आदेश इस चर्चित हत्याकांड में एक अहम कानूनी मोड़ माना जा रहा है।

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