सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन जारी, बोले- संघर्ष जारी रखूंगा

Update: 2026-07-16 04:25 GMT

नई दिल्ली : सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा अनशन 19वें दिन भी जारी है। लंबे समय से उपवास पर बैठे वांगचुक ने साफ कर दिया है कि वह अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। विपक्षी दलों के नेताओं, फिल्मी हस्तियों, आम लोगों और अदालत की ओर से अनशन खत्म करने की अपील के बावजूद उन्होंने इसे जारी रखने का फैसला किया है। वांगचुक का कहना है कि उनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि वह कुछ ही दिनों में गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे और वह अभी कई दिनों तक अनशन जारी रखने में सक्षम हैं।

सोनम वांगचुक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर जारी उनके अनशन को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों, राजनीतिक नेताओं और आम लोगों का समर्थन भी मिल रहा है। वहीं, कुछ लोगों ने उनकी सेहत को देखते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। हालांकि, वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक वह अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

वांगचुक ने अपनी सेहत को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह चिकित्सकीय निगरानी में हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उपवास करना आसान नहीं होता, लेकिन उनका उद्देश्य किसी तरह का व्यक्तिगत लाभ हासिल करना नहीं, बल्कि उन मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करना है जिनके लिए वह आंदोलन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें अनशन खत्म करने की सलाह दी है, लेकिन उनका मानना है कि आंदोलन को उसके उद्देश्य तक पहुंचाना जरूरी है। वांगचुक ने यह भी कहा कि वह अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अभी वह अनशन जारी रखने की स्थिति में हैं और जल्द इसे समाप्त करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कई विपक्षी नेताओं ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है और सरकार से उनकी मांगों पर विचार करने की अपील की है। कुछ फिल्मी कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। इसके अलावा आम नागरिकों का एक वर्ग भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके समर्थन में अपनी बात रख रहा है।

वहीं, प्रशासन की ओर से भी समय-समय पर उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम उनके स्वास्थ्य की जांच कर रही है। लंबे समय तक उपवास के कारण शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए चिकित्सक नियमित रूप से उनकी निगरानी कर रहे हैं।

सोनम वांगचुक देश में पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक विषयों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन को लेकर लोगों में इसलिए भी रुचि है क्योंकि वह पहले भी कई जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते रहे हैं।

आंदोलन स्थल पर समर्थकों की मौजूदगी भी लगातार बनी हुई है। लोग वहां पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात कर रहे हैं और उनके अभियान के प्रति समर्थन जता रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है। उन्होंने समर्थकों से भी शांति बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी मांग को उठाने का रास्ता संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया ही होना चाहिए।

19 दिनों से जारी इस अनशन ने एक बार फिर सामाजिक आंदोलनों और जनहित के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे किस तरह की बातचीत होती है और क्या इस मुद्दे का कोई समाधान निकलता है।

फिलहाल सोनम वांगचुक अपने निर्णय पर कायम हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह जल्द अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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