नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार और विभिन्न एजेंसियों की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वाहन मालिकों की लापरवाही चिंता बढ़ा रही है। प्रदूषण बढ़ने वाले सीजन की शुरुआत से पहले ही वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) बनवाने वालों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में जून और जुलाई की तुलना में अगस्त में सबसे कम वाहनों ने पीयूसीसी बनवाया है। इसे प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है।
अगस्त में सबसे कम बने पीयूसीसी
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में केवल 2 लाख 91 हजार 600 वाहनों के पीयूसीसी बनाए गए।
जबकि जून में यह संख्या 3 लाख 58 हजार 583 थी। जुलाई में इसमें गिरावट दर्ज की गई और कुल 3 लाख 44 हजार 481 वाहनों का ही प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाया गया।
इस तरह केवल दो महीनों में ही पीयूसीसी बनवाने वाले वाहनों की संख्या करीब 67 हजार कम हो गई।
पिछले साल की तुलना में भी गिरावट
इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक के आंकड़ों की तुलना पिछले वर्ष की इसी अवधि से करने पर भी बड़ी गिरावट सामने आई है।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में अब तक करीब 2 लाख 94 हजार 660 कम पीयूसीसी जारी किए गए हैं।
यह स्थिति तब है जब दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है और वाहन उत्सर्जन को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी है पीयूसीसी
वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली में प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल है।
पीयूसीसी यह प्रमाणित करता है कि वाहन निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदूषण कर रहा है या नहीं।
समय पर प्रदूषण जांच कराने से खराब स्थिति वाले वाहनों की पहचान की जा सकती है और उनसे होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
प्रदूषण बढ़ने वाले महीने करीब
दिल्ली में अक्टूबर से फरवरी तक प्रदूषण की समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है।
इस दौरान मौसम की स्थिति, पराली का धुआं, वाहनों का उत्सर्जन और अन्य कारणों से हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
ऐसे में वाहनों की नियमित जांच और पीयूसीसी बनवाना बेहद जरूरी माना जाता है।
वाहन मालिकों की लापरवाही पर सवाल
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में वाहन मालिक समय पर प्रदूषण जांच नहीं कराते।
कई लोग केवल चालान से बचने के लिए पीयूसीसी बनवाते हैं, जबकि इसका उद्देश्य पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।
अधिकारियों का कहना है कि वाहन मालिकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
सरकार और एजेंसियों की चुनौती बढ़ी
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। इनमें वाहनों की जांच, पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई और जागरूकता अभियान शामिल हैं।
लेकिन यदि वाहन मालिक पीयूसीसी बनवाने में रुचि नहीं दिखाएंगे तो प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को अपेक्षित सफलता मिलना मुश्किल होगा।
सख्ती बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं बनवाने वाले वाहन मालिकों पर सख्ती बढ़ाने की जरूरत है।
इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि वे इसे केवल कानूनी औपचारिकता न समझकर पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देखें।
प्रदूषण नियंत्रण में जनभागीदारी जरूरी
दिल्ली जैसे महानगर में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
वाहनों की समय पर जांच, नियमित रखरखाव और पीयूसीसी बनवाना हर वाहन मालिक की जिम्मेदारी है।
आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में पीयूसीसी बनवाने की रफ्तार कम हो रही है, जबकि प्रदूषण का खतरा लगातार बना हुआ है। ऐसे में आने वाले महीनों में दिल्ली के लिए यह चुनौती और बढ़ सकती है।