नायडू को राहत सुप्रीम कोर्ट ने जमीन पूलिंग मामले में हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और मंत्री पी. नारायण से जुड़े जमीन पूलिंग स्कीम मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। यह मामला जमीन पूलिंग योजना में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मुख्यमंत्री नायडू और मंत्री पी. नारायण के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वह हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस याचिका के परिणाम का अन्य मामलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिनकी सुनवाई अलग-अलग स्तरों पर चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और मंत्री पी. नारायण को राहत मिली है। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
मामला आंध्र प्रदेश की राजधानी क्षेत्र से जुड़ी जमीन पूलिंग योजना में कथित गड़बड़ियों के आरोपों से संबंधित था। आरोप लगाया गया था कि योजना के क्रियान्वयन में कुछ अनियमितताएं हुई थीं और इसमें तत्कालीन सरकार के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री नायडू और मंत्री नारायण के खिलाफ मामले को रद्द कर दिया था। इसके बाद इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं दिखता। अदालत ने यह भी कहा कि मौजूदा मामले का फैसला अन्य लंबित मामलों को प्रभावित नहीं करेगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी मामले में हस्तक्षेप से इनकार करने का मतलब यह होता है कि हाई कोर्ट का आदेश इस मामले में प्रभावी रहेगा। हालांकि, इससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई अपने-अपने तथ्यों और कानूनी पहलुओं के आधार पर जारी रह सकती है।
चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह इससे पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं और राज्य की राजधानी क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों को लेकर उनकी सरकार की कई योजनाएं चर्चा में रही हैं।
जमीन पूलिंग योजना के तहत किसानों और जमीन मालिकों से जमीन लेकर विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की व्यवस्था की गई थी। इस योजना को लेकर समय-समय पर राजनीतिक विवाद भी सामने आते रहे हैं।
विपक्षी दलों ने इस योजना को लेकर कई आरोप लगाए थे, जबकि नायडू और उनकी सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया जाता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले के बाद इस मामले में मुख्यमंत्री और मंत्री को कानूनी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस याचिका के आधार पर अन्य मामलों की स्थिति प्रभावित नहीं होगी।
अब संबंधित अन्य मामलों पर अलग-अलग अदालतों में सुनवाई जारी रहेगी। जांच और कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित तरीके से आगे बढ़ेगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नायडू और नारायण के खिलाफ जमीन पूलिंग मामले में हाई कोर्ट का आदेश कायम रहेगा।