नई दिल्ली: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद जारी राहत एवं बचाव अभियान में मदद करने के लिए दिल्ली-NCR के चर्चित 'रैट माइनर्स' की टीम ने आगे आने की इच्छा जताई है। टीम ने नेपाल में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में शामिल होने की अनुमति मांगी है। इसके लिए नेपाल के राजदूत को पत्र लिखकर अपनी सेवाएं देने की पेशकश की गई है।

रैट माइनर्स की यह टीम संकरी और मुश्किल जगहों पर खुदाई कर रास्ता बनाने में विशेषज्ञ मानी जाती है। उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के अभियान के अंतिम चरण में रैट-होल माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल करने वाले श्रमिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मशीनों के सामने आई बाधाओं के बाद इन श्रमिकों ने हाथ से खुदाई कर अंतिम हिस्से में रास्ता बनाया था। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में बड़े पैमाने पर मलबा जमा है। कई लोगों के फंसे या लापता होने की खबरों के बीच अलग-अलग बचाव एजेंसियां अभियान चला रही हैं। ऐसे में दिल्ली-NCR के रैट माइनर्स का मानना है कि संकरी जगहों और मलबे के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए उनका अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है।

नेपाल के राजदूत को भेजा पत्र
टीम की ओर से नेपाल के राजदूत को लिखे गए पत्र में राहत एवं बचाव अभियान में शामिल होने की अनुमति मांगी गई है। टीम ने अपनी विशेषज्ञता और पहले किए गए बचाव कार्य का उल्लेख करते हुए नेपाल में जरूरत पड़ने पर सहयोग देने की इच्छा जताई है। हालांकि किसी दूसरे देश में राहत एवं बचाव अभियान में शामिल होने के लिए संबंधित सरकार और प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है। इसलिए टीम अपने स्तर पर नेपाल रवाना होने के बजाय आधिकारिक मंजूरी का इंतजार कर रही है।
सिलक्यारा रेस्क्यू से मिली थी पहचान
नवंबर 2023 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सिलक्यारा सुरंग में निर्माण कार्य के दौरान 41 मजदूर फंस गए थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए कई दिनों तक बड़े स्तर पर बचाव अभियान चला था। अंतिम चरण में जब ऑगर मशीन बाधाओं के कारण आगे नहीं बढ़ सकी तो रैट माइनर्स को बुलाया गया था। इन श्रमिकों ने बेहद संकरे पाइप के भीतर जाकर हाथ से मलबा हटाया और फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए रास्ता तैयार करने में मदद की। इसके बाद सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। इस अभियान के बाद रैट माइनर्स की टीम देशभर में चर्चा में आई थी।
मुश्किल जगहों पर काम करने का अनुभव
रैट-होल माइनिंग तकनीक में बेहद संकरी जगह में जाकर हाथ से खुदाई की जाती है। खनन के संदर्भ में यह तरीका सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी गंभीर जोखिमों के कारण विवादित रहा है। हालांकि सिलक्यारा जैसे आपातकालीन बचाव अभियान में संकरी जगह पर मैनुअल खुदाई की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया था। नेपाल की मौजूदा आपदा में भी टीम इसी तरह अपनी विशेषज्ञता से मदद करना चाहती है। यदि आधिकारिक अनुमति मिलती है तो टीम स्थानीय और अन्य बचाव एजेंसियों के निर्देशन में काम कर सकती है।
अनुमति मिलने का इंतजार
फिलहाल रैट माइनर्स ने अपनी ओर से मदद की पेशकश कर दी है। अब नेपाल सरकार और संबंधित अधिकारियों की अनुमति पर आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी। अनुमति मिलने के बाद ही टीम नेपाल जाकर औपचारिक रूप से बचाव अभियान में शामिल हो सकेगी। नेपाल में बड़े पैमाने पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच भारतीय रैट माइनर्स की यह पेशकश मानवीय सहयोग की एक और पहल के रूप में सामने आई है। सिलक्यारा सुरंग में अपनी क्षमता दिखा चुकी टीम अब नेपाल में भी जरूरत पड़ने पर कठिन परिस्थितियों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए तैयार है।
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