NHAI के टोल प्लाजा पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा ED ने कई राज्यों में की छापेमारी
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI से जुड़े कई टोल प्लाजा पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत कई राज्यों में छापेमारी की। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के प्रावधानों के तहत की गई है। मामले में अलग-अलग राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने जांच शुरू की है।
जानकारी के मुताबिक टोल प्लाजा के संचालन और उससे संबंधित वित्तीय गतिविधियों में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। विभिन्न स्थानों पर दर्ज मामलों में धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने इस बात की जांच शुरू की कि कथित फर्जीवाड़े के जरिए अर्जित रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया।
ईडी की कार्रवाई कई राज्यों तक फैली हुई है। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े संदिग्ध व्यक्तियों, कंपनियों और अन्य प्रतिष्ठानों से संबंधित ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी का मुख्य उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित धन के प्रवाह का पता लगाना और उससे संबंधित वित्तीय दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों को जुटाना है।
प्रवर्तन निदेशालय ने राज्यों की पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए PMLA के तहत जांच आगे बढ़ाई है। आमतौर पर धनशोधन से जुड़े मामलों में ईडी मूल अपराध से अर्जित रकम के लेन-देन, निवेश और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करती है। इसी आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि कथित अवैध कमाई को वैध संपत्ति या कारोबार के रूप में दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई।
NHAI के टोल प्लाजा देश के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यहां वाहनों से निर्धारित नियमों के तहत टोल शुल्क लिया जाता है। बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही के कारण प्रमुख टोल प्लाजा पर प्रतिदिन बड़ी रकम का लेन-देन होता है। ऐसे में टोल संचालन में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आने पर उसका दायरा बड़ा हो सकता है।
जांच एजेंसी अब टोल प्लाजा से होने वाली वास्तविक आय और आधिकारिक रिकॉर्ड में दिखाई गई रकम का मिलान कर सकती है। इसके अलावा बैंक खातों में हुए लेन-देन, टोल संचालन से जुड़े अनुबंध, भुगतान के रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों के वित्तीय दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
मामले में अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर महत्वपूर्ण आधार बनी हैं। इन एफआईआर में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ईडी धनशोधन के पहलू की जांच कर रही है। पुलिस की जांच मुख्य अपराध और धोखाधड़ी से संबंधित आरोपों पर केंद्रित रहती है, जबकि ईडी कथित अपराध से हासिल रकम और उसके इस्तेमाल का पता लगाने का प्रयास करती है।
टोल प्लाजा पर फर्जीवाड़े के मामले में डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। देश के अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। इसके कारण वाहनों की आवाजाही और टोल भुगतान से संबंधित बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा उपलब्ध रहता है। जांच एजेंसी इस डेटा और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर संभावित गड़बड़ियों की पहचान कर सकती है।
इसके साथ ही टोल संचालन करने वाली एजेंसियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि कथित धोखाधड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें कितने लोग या संस्थाएं शामिल थीं। यदि जांच में अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान होती है तो PMLA के तहत आगे की कार्रवाई भी संभव है।
कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई होने से मामले का दायरा व्यापक माना जा रहा है। जांच एजेंसी अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर सकती है। यदि एक जैसी कार्यप्रणाली या आपस में जुड़े लेन-देन सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल संग्रह व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। वाहन चालकों से वसूली जाने वाली राशि और सरकार या संबंधित प्राधिकरण को मिलने वाले राजस्व का सही रिकॉर्ड होना आवश्यक है। किसी स्तर पर फर्जीवाड़ा होने की स्थिति में इससे न केवल सरकारी राजस्व प्रभावित हो सकता है बल्कि पूरी टोल व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
ईडी की छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री की जांच के बाद मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं। वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने के लिए बैंक खातों और संबंधित संस्थाओं के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा सकती है। जांच में जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनसे पूछताछ किए जाने की संभावना है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित फर्जीवाड़े से सरकारी राजस्व को कितना नुकसान हुआ और इसके जरिए कितनी रकम अर्जित की गई। जांच पूरी होने और एजेंसी की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही धोखाधड़ी के वास्तविक दायरे का पता चल सकेगा।
NHAI के कई टोल प्लाजा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े पर ईडी की कार्रवाई ने टोल संचालन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई राज्यों की पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई धनशोधन जांच अब कथित अवैध कमाई और उसके इस्तेमाल की कड़ियां तलाश रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर मामले में और कार्रवाई हो सकती है।