नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की तीखी आलोचना की है। बुधवार को उन्होंने कहा कि आलोचना करने वाले लोग आंकड़ों की सही तरीके से तुलना तक नहीं कर रहे हैं और इसके जरिए देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। गोयल ने कहा कि आर्थिक आंकड़ों की तुलना समान आधार पर होनी चाहिए और अलग-अलग आधार वाले आंकड़ों को सामने रखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
पीयूष गोयल ने जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों को लेकर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आलोचक ‘सेब की तुलना सेब से करना’ भी नहीं जानते। उनका इशारा अलग-अलग आधार पर तैयार किए गए आर्थिक आंकड़ों की तुलना किए जाने की ओर था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहा है।
जीडीपी के आंकड़ों को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर बहस जारी है। सरकार देश की आर्थिक वृद्धि को मजबूत बताते हुए इसे नीतिगत सुधारों और घरेलू मांग का परिणाम बता रही है। दूसरी ओर विपक्ष और कुछ अर्थशास्त्रियों की ओर से आंकड़ों की गणना और तुलना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का बयान सामने आया है।
गोयल ने पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की टिप्पणियों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण करते समय यह समझना जरूरी है कि उनकी गणना किस आधार और पद्धति से की गई है। यदि अलग-अलग आधार पर तैयार आंकड़ों की सीधे तुलना की जाती है तो उससे वास्तविक स्थिति की सही तस्वीर सामने नहीं आएगी।
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि सरकार की ओर से प्रस्तुत आर्थिक आंकड़ों को निर्धारित सांख्यिकीय पद्धति के तहत तैयार किया जाता है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गणना के तरीके और आधार को समझना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि आर्थिक आंकड़ों को राजनीतिक मुद्दा बनाकर लोगों के सामने गलत तस्वीर पेश की जा रही है।
देश की जीडीपी वृद्धि दर सरकार के आर्थिक प्रदर्शन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक मानी जाती है। आर्थिक विकास की गति का अंदाजा लगाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद में होने वाली वृद्धि पर नजर रखी जाती है। उद्योग, सेवा, कृषि, निर्माण और अन्य क्षेत्रों के प्रदर्शन का असर जीडीपी वृद्धि पर पड़ता है।
7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर को लेकर सरकार इसे अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के रूप में पेश कर रही है। सरकार का तर्क है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने मजबूत विकास दर बनाए रखी है। बुनियादी ढांचे में निवेश, विनिर्माण को बढ़ावा, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और घरेलू खपत जैसे कारकों को आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपक्ष हालांकि सरकार के दावों पर सवाल उठा रहा है। महंगाई, रोजगार, आम लोगों की आय और विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन को लेकर विपक्ष सरकार को घेरता रहा है। जीडीपी के नए आंकड़े सामने आने के बाद आर्थिक विकास की वास्तविक स्थिति को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हुई है।
इसी क्रम में पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की ओर से की गई टिप्पणी पर भी गोयल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि आंकड़ों की तुलना करते समय समान मापदंड अपनाना चाहिए। अलग-अलग सीरीज या गणना पद्धति से तैयार आंकड़ों को सीधे एक-दूसरे के सामने रखकर तुलना करने से गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं।
‘सेब की तुलना सेब से’ करने वाली टिप्पणी के जरिए गोयल ने इसी बात पर जोर दिया कि आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण समान आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि आधार अलग है तो पहले उसे समझना और उसके अनुसार तुलना करना आवश्यक है।
आर्थिक आंकड़ों को लेकर होने वाली बहस केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहती। अर्थशास्त्री भी जीडीपी की गणना, आधार वर्ष, वास्तविक और मौजूदा कीमतों तथा विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का विश्लेषण करते हैं। किसी भी विकास दर को समझने के लिए उसके पीछे मौजूद सांख्यिकीय पद्धति को देखना जरूरी होता है।
सरकार और विपक्ष के बीच अर्थव्यवस्था को लेकर लंबे समय से राजनीतिक टकराव बना हुआ है। सरकार जहां भारत को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताती है, वहीं विपक्ष रोजगार, महंगाई और आय असमानता जैसे मुद्दों के आधार पर आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाता है। जीडीपी वृद्धि दर को लेकर मौजूदा विवाद भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि आर्थिक उपलब्धियों को लेकर गलत या असमान आंकड़ों की तुलना के आधार पर सरकार को घेरना उचित नहीं है। उन्होंने आलोचकों से आर्थिक आंकड़ों का सही संदर्भ में विश्लेषण करने की बात कही। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच भ्रम पैदा करने के लिए आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में जीडीपी वृद्धि को लेकर यह बहस और तेज हो सकती है। विपक्ष की ओर से सरकार के आर्थिक दावों पर सवाल उठाए जाने की संभावना है, जबकि केंद्र सरकार आंकड़ों और आर्थिक संकेतकों के जरिए अपने प्रदर्शन का बचाव करेगी।
फिलहाल 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक विवाद को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने विपक्ष और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की आलोचना करते हुए साफ कहा है कि आर्थिक आंकड़ों की तुलना समान आधार पर की जानी चाहिए। उनके मुताबिक अलग-अलग आधार वाले आंकड़ों को मिलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।