नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर किए गए कटाक्ष और कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोनों नेताओं की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें निराशाजनक और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति निराशा अथवा असहमति हो सकती है लेकिन उन्हें नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने देश और विदेश में भारत का मान बढ़ाया है तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम किया है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री पर की गई कथित ओछी टिप्पणी से न केवल व्यक्तिगत मर्यादा बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं को भी नुकसान पहुंचता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने किसी नेता प्रतिपक्ष को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते नहीं देखा। उन्होंने पूर्व नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सुषमा स्वराज अरुण जेटली अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने विपक्ष में रहते हुए हमेशा संसदीय और राजनीतिक मर्यादा का पालन किया। इसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने भी नेता प्रतिपक्ष अथवा विपक्षी नेताओं के रूप में शालीनता बनाए रखी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम उनके लिए व्यक्तिगत रूप से पीड़ादायक है। लोकतंत्र में सरकार की आलोचना विपक्ष का अधिकार है लेकिन आलोचना की भाषा ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे संवैधानिक पदों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे। उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार को अशोभनीय बताते हुए कहा कि इस तरह का आचरण भारतीय लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए पार्टी से आत्ममंथन करने को कहा। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह की भाषा और व्यवहार के बाद क्या कांग्रेस खुद को लाल बाल पाल महात्मा गांधी सरदार पटेल जवाहरलाल नेहरू सुभाष चंद्र बोस राजेंद्र प्रसाद लाल बहादुर शास्त्री पीवी नरसिम्हा राव और प्रणब मुखर्जी जैसे नेताओं की महान विरासत का उत्तराधिकारी बता सकती है।
राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की टिप्पणी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही अपमान नहीं हुआ बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद लोकतांत्रिक व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस पद पर बैठे व्यक्ति से गंभीरता संयम और जिम्मेदार भाषा की अपेक्षा की जाती है।
विवाद गुरुवार को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कन्वेंशन के दौरान शुरू हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया था। विदेश नीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को लगता है कि विदेशी नेताओं को गले लगाना ही विदेश नीति है। इसके बाद उन्होंने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को बुलाया और उन्हें गले लगाकर अपनी बात को अभिनय के माध्यम से समझाने का प्रयास किया।
इसी दौरान संदीप दीक्षित ने मजाकिया लहजे में पूछा कि कहीं उन्हें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगाया गया। इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि वह अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। इस बातचीत के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोग हंसने लगे लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री और इटली की प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक बताया।
भाजपा ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने विदेश नीति जैसे गंभीर विषय को मजाक का हिस्सा बना दिया। वहीं कांग्रेस की ओर से कहा गया कि राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति और प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर राजनीतिक व्यंग्य किया था। राजनाथ सिंह की प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद अब कांग्रेस और भाजपा के बीच नए राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है।
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