नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारी बारिश ने एक बार फिर जलभराव और ट्रैफिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में सड़कें पानी से भर गईं। कहीं वाहनों के पहिए पानी में डूबते दिखाई दिए तो कहीं लोगों को घुटनों तक भरे पानी से गुजरना पड़ा। सबसे ज्यादा चिंता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि आने वाले दिनों में दिल्ली में BRICS से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठकों के लिए विदेशी प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर राजधानी की प्रमुख सड़कों पर दिख रहे जलभराव ने प्रशासनिक तैयारियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली में बारिश के बाद हर साल जलभराव की तस्वीरें सामने आती रही हैं। इस बार भी कुछ घंटों की बारिश ने कई महत्वपूर्ण रास्तों को प्रभावित किया। एयरपोर्ट की ओर जाने वाली सड़कों से लेकर शहर के अंदरूनी हिस्सों तक कई स्थानों पर पानी जमा हो गया। इससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कुछ मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई।
IGI एयरपोर्ट के आसपास भी जलभराव
दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में शामिल है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों की दिल्ली यात्रा के दौरान यही एयरपोर्ट उनकी एंट्री का प्रमुख केंद्र होता है। ऐसे में एयरपोर्ट के आसपास बेहतर सड़क और ड्रेनेज व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बारिश के बाद एयरपोर्ट और आसपास के इलाकों में पानी जमा होने की तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा। सड़कों पर जमा पानी के बीच वाहन गुजरते दिखाई दिए। कुछ जगह पानी की मात्रा इतनी अधिक थी कि वाहन चालकों को बेहद धीमी गति से आगे बढ़ना पड़ा।
जलभराव के कारण केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं होती बल्कि सड़क पर गड्ढों का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। पानी ज्यादा होने पर छोटे वाहनों और दोपहिया चालकों के लिए परेशानी और बढ़ जाती है।
BRICS बैठकों से पहले चिंता
दिल्ली में BRICS से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यक्रम और बैठकें आयोजित होनी हैं। इनमें हिस्सा लेने के लिए अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि राजधानी पहुंच सकते हैं। ऐसे में दिल्ली की सड़कों, एयरपोर्ट मार्ग और आयोजन स्थलों के आसपास की व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय आयोजन से पहले राजधानी में जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि आयोजन के दौरान तेज बारिश हुई तो विदेशी मेहमानों की आवाजाही कैसे सुचारू रखी जाएगी।
दिल्ली पहले भी G20 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी कर चुकी है। ऐसे आयोजनों के दौरान सड़कों की मरम्मत, साफ-सफाई, सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है। BRICS कार्यक्रमों के दौरान भी प्रशासन को इसी तरह की तैयारी करनी होगी।
कुछ घंटों की बारिश और सड़कों पर पानी
दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव नई समस्या नहीं है। हर साल बारिश के दौरान कई अंडरपास, मुख्य सड़कें और कॉलोनियों के रास्ते पानी में डूब जाते हैं।
इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। नालियों की क्षमता कम होना, समय पर गाद नहीं निकलना, सड़क निर्माण के दौरान पानी की निकासी का सही इंतजाम न होना और अत्यधिक बारिश के दौरान ड्रेनेज सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ना प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
जब कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होती है तो ड्रेनेज सिस्टम पानी को उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाता। नतीजा यह होता है कि पानी सड़कों पर जमा होने लगता है।
ट्रैफिक पर पड़ा असर
जलभराव का सीधा असर दिल्ली के ट्रैफिक पर दिखाई देता है। जिन सड़कों पर सामान्य दिनों में वाहन तेज गति से चलते हैं, वहां पानी भरने के बाद ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी हो जाती है।
वाहन चालक पानी से भरे हिस्से से सावधानीपूर्वक गुजरते हैं। इससे पीछे लंबी कतारें लग सकती हैं। अगर किसी वाहन का इंजन पानी में बंद हो जाए तो स्थिति और खराब हो जाती है।
एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के लिए यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है। फ्लाइट का समय तय होता है और रास्ते में जाम लगने से यात्रियों के देर से पहुंचने का खतरा रहता है। इसी वजह से बारिश के दिनों में एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी जाती है।
दिल्ली में बार-बार क्यों भरता है पानी?
राजधानी में जलभराव के पीछे केवल बारिश को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। शहर की तेजी से बढ़ती आबादी और निर्माण गतिविधियों ने भी ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव बढ़ाया है।
कई इलाकों में पुराने नाले आज की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा प्लास्टिक, कचरा और गाद जमा होने से नालियों की पानी निकालने की क्षमता कम हो जाती है।
सड़क और फुटपाथ के निर्माण के दौरान प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अगर सड़क का स्तर आसपास के इलाके से ऊंचा हो जाए तो पानी नीचे स्थित कॉलोनियों में जमा होने लगता है।
इसी तरह कई अंडरपास में पंपिंग सिस्टम पर निर्भरता होती है। ज्यादा बारिश होने या पंपिंग सिस्टम में समस्या आने पर कुछ ही समय में वहां पानी भर सकता है।
विदेशी मेहमानों के रूट पर खास नजर
BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष ट्रैफिक रूट तैयार किए जाते हैं। एयरपोर्ट से होटल और आयोजन स्थल तक आने-जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।
अगर इन्हीं मार्गों पर बारिश के दौरान जलभराव होता है तो प्रशासन को वैकल्पिक रास्तों और तेजी से पानी निकालने की व्यवस्था पहले से तैयार रखनी होगी।
ऐसे आयोजनों में सुरक्षा कारणों से कई सड़कों पर आम वाहनों की आवाजाही सीमित भी की जा सकती है। जलभराव होने की स्थिति में ट्रैफिक डायवर्जन की जरूरत बढ़ सकती है।
दिल्ली की छवि का भी सवाल
देश की राजधानी होने के कारण दिल्ली में होने वाली किसी भी बड़ी घटना या समस्या पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रहती है। जब किसी वैश्विक कार्यक्रम के लिए विदेशी प्रतिनिधि पहुंचते हैं तो शहर की साफ-सफाई, यातायात और बुनियादी ढांचा भी चर्चा का हिस्सा बनता है।
यही वजह है कि BRICS कार्यक्रमों से पहले सामने आई जलभराव की तस्वीरों को केवल मानसून की सामान्य समस्या के रूप में नहीं देखा जा रहा।
सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हर साल बारिश के बाद राजधानी की सड़कों पर वही स्थिति क्यों बन जाती है।
एजेंसियों के बीच तालमेल बड़ी चुनौती
दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था कई एजेंसियों में बंटी हुई है। अलग-अलग सड़कों, नालों और क्षेत्रों की जिम्मेदारी अलग संस्थाओं के पास हो सकती है। ऐसे में जलभराव रोकने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है।
एक एजेंसी सड़क की जिम्मेदारी संभालती है तो दूसरी नाले की। कई बार नाले का पानी किसी अन्य एजेंसी के बड़े ड्रेन में जाता है। इस पूरी श्रृंखला में कहीं भी रुकावट होने पर सड़क पर पानी भर सकता है।
इसी कारण मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर हर साल बड़े स्तर पर तैयारियों की जरूरत पड़ती है।
बारिश के बाद प्रशासन के सामने चुनौती
प्रशासन के सामने फिलहाल पहली चुनौती उन जगहों की पहचान करना है जहां बार-बार जलभराव हो रहा है। पानी निकालने के लिए पंप लगाने, नालों की सफाई और ट्रैफिक डायवर्जन जैसे कदम तत्काल राहत दे सकते हैं।
लेकिन लंबे समय के समाधान के लिए दिल्ली के ड्रेनेज नेटवर्क को शहर की मौजूदा आबादी और निर्माण के हिसाब से मजबूत करना जरूरी है।
खासकर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, अस्पताल और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से जुड़े मार्गों पर ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिससे भारी बारिश के दौरान भी यातायात ज्यादा देर प्रभावित न हो।
बारिश के दौरान वाहन चालक रखें सावधानी
सड़क पर पानी जमा होने की स्थिति में वाहन चालकों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बहुत ज्यादा पानी होने पर बिना गहराई का अंदाजा लगाए वाहन आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा ज्यादा होता है क्योंकि पानी के नीचे गड्ढा या खुला मैनहोल दिखाई नहीं देता। कार चालकों को भी बहुत तेज गति से पानी में प्रवेश करने से बचना चाहिए।
अगर किसी रास्ते पर बहुत ज्यादा पानी है तो वैकल्पिक मार्ग चुनना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
BRICS से पहले व्यवस्था सुधारने का दबाव
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से पहले दिल्ली की एजेंसियां इन जलभराव वाले स्थानों पर क्या कदम उठाती हैं। विदेशी प्रतिनिधियों की आवाजाही वाले मार्गों पर जल निकासी की व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है।
बारिश को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसका असर कितना होगा, यह काफी हद तक शहर की तैयारियों पर निर्भर करता है। बेहतर ड्रेनेज, समय पर नालों की सफाई, पंपिंग व्यवस्था और प्रभावी ट्रैफिक मैनेजमेंट से समस्या को कम किया जा सकता है।
फिलहाल शनिवार की बारिश ने दिल्ली को एक बार फिर पुरानी समस्या की याद दिला दी है। एयरपोर्ट के आसपास से लेकर शहर की कई सड़कों तक पानी जमा होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। अब BRICS से जुड़े कार्यक्रमों से पहले प्रशासन के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि अगली तेज बारिश के दौरान यही तस्वीर दोबारा न दिखाई दे।
क्योंकि इस बार सवाल केवल दिल्ली के लोगों की रोजमर्रा की परेशानी का नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान दुनिया के अलग-अलग देशों से आने वाले प्रतिनिधियों की नजर भी राजधानी की व्यवस्थाओं पर होगी।
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