Delhi दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (SRCC) में 13 साल बाद लौटे प्रधानमंत्री ने युवाओं से जुड़ने के लिए 'OG' से लेकर 'धुरंधर' जैसे 'Gen Z' स्लैंग का इस्तेमाल किया और उन्हें बताया कि भारत उनके सपनों को उड़ान देने के लिए तैयार है। उन्होंने छात्रों से पूछा, "पहले से कहीं बड़े सपने देखें। आज भारतीय दुनिया की टॉप कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। तो फिर भारतीयों द्वारा बनाई गई कंपनियाँ दुनिया का नेतृत्व क्यों नहीं कर सकतीं?" इस दौरान छात्रों ने कई बार तालियाँ बजाईं।
प्रधानमंत्री ने फरवरी 2013 के अपने उस भाषण को भी याद किया जिसमें उन्होंने पहली बार P2G2 (जन-हितैषी सुशासन) का विज़न दिया था और कहा था कि भारत 'पॉलिसी पैरालिसिस' (नीतिगत गतिरोध) से निकलकर 'पॉलिसी डायनामिज़्म' (नीतिगत गतिशीलता) की ओर बढ़ गया है। आर्थिक विकास के आँकड़ों पर चल रही बहस के बीच मोदी ने कहा, "जो लोग भारत को 'Fragile 5' (कमज़ोर अर्थव्यवस्थाओं के समूह) में धकेलने के लिए ज़िम्मेदार थे, वे अब भारत की 7.8 प्रतिशत की विकास दर को पचा नहीं पा रहे हैं।" प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर 'दिमागी नक्सल' वाले तंज़ को और मज़बूती से दोहराते हुए कहा, "मैंने लाल किले से एक होम्योपैथिक दवा दी थी — 'दिमागी नक्सल' की दवा। होम्योपैथी में जब आप इलाज शुरू करते हैं, तो बीमारी पहले और बिगड़ती है। इसलिए जैसे ही मैंने 'दिमागी नक्सल' वाली होम्योपैथिक दवा दी, सारे 'दिमागी नक्सल' एक-एक करके सामने आने लगे। और अब लोग उनका असली चेहरा देख सकते हैं।"
अपने आलोचकों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कैंपस से निकलने के बाद छात्रों को दो तरह के लोग मिलेंगे।
मोदी ने कहा, "एक तरह के लोग वे होते हैं जो समाज की ऊर्जा को राष्ट्रीय शक्ति में बदलते हैं। दूसरी तरह के लोग वे होते हैं जो हमेशा शिकायत करते रहते हैं, 'नाराज़ फूफा' की तरह। जब भी हम कुछ नया शुरू या लॉन्च करते हैं, तो इन लोगों का बस एक ही सवाल होता है — इसकी क्या ज़रूरत है? लेकिन देश को अब वही मिलेगा जो उसके विकास के लिए ज़रूरी है।" उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के समय की तुलना BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार के समय से की और कहा कि जिन कामों में पहले दशकों लग जाते थे, वे अब कुछ ही सालों में पूरे हो रहे हैं। SRCC के शताब्दी वर्ष में यह भाषण NEET-UG पेपर लीक को लेकर हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के ठीक बाद हुआ। इसमें प्रधानमंत्री ने BJP के 12 साल की "कामयाबी" के मुकाबले UPA के पुराने शासनकाल को "नकारात्मकता" का दौर बताया। SRCC में 2013 में दिए गए अपने भाषण को याद करते हुए, जो आज भी "लोगों के मन में बसा हुआ है", मोदी ने कहा, "जब मैंने वह भाषण दिया था, तब मैं देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का सदस्य भी था। लोगों को उम्मीद थी कि मैं केंद्र की तत्कालीन सरकार पर हमला करूंगा, लेकिन मैंने इस मंच का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं किया। बल्कि, मैंने देश के लिए एक विज़न पेश किया और आज मैं अपने रिपोर्ट कार्ड के साथ यहां मौजूद हूं।"
मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों में "कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे गंभीर आधुनिक संकटों का मजबूती से सामना करने" का ज़िक्र किया। 2013 के भाषण को याद करते हुए उन्होंने छात्रों से सकारात्मक रहने को कहा। उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि पानी से आधे भरे गिलास को तीन तरह से देखा जा सकता है: आधा भरा हुआ, आधा खाली, या पानी और हवा से पूरा भरा हुआ। वे निराशा के दिन थे, लेकिन मैंने कहा था कि मैं गिलास को पानी और हवा से लबालब भरा हुआ देखता हूं। आज 140 करोड़ भारतीय भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों का आशीर्वाद उन आलोचकों की साजिशों को नाकाम करता रहता है जो मोदी को फंसाना चाहते हैं।
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