नई दिल्ली। जंतर-मंतर से संसद भवन तक 20 जुलाई को निकाले गए मार्च और उसके दौरान हुई कथित अराजकता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रदर्शन केवल छात्रों के मुद्दे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे किसी बड़ी साजिश और विदेशी फंडिंग की संभावना की जांच की जानी चाहिए।
यह जनहित याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन बाद में राजनीतिक स्वरूप लेता गया। इसमें कई राजनीतिक लोगों की भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक हुए मार्च के दौरान हालात बिगड़ गए थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई, पत्रकारों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ और पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
याचिका में कहा गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रदर्शन के आयोजन में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसमें किसी बाहरी संगठन की भूमिका थी या नहीं और क्या किसी तरह की आर्थिक सहायता या विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह आंदोलन केवल छात्रों की समस्याओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे देश को अस्थिर करने वाली ताकतों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रदर्शन में शामिल होने का भी जिक्र किया गया है। इसमें विदेशी संगठनों के साथ उनके कथित संबंधों और फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी संगठनों, आर्थिक स्रोतों और संस्थागत संबंधों की विस्तृत जांच होनी चाहिए।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि जांच एजेंसी प्रदर्शन के आयोजकों, इसमें शामिल लोगों और कथित बाहरी प्रभावों की भूमिका की पड़ताल करे। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि किसी भी तरह की विदेशी सहायता या साजिश सामने आती है तो उसकी जानकारी देश के सामने आनी चाहिए।
गौरतलब है कि जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की थी। अब इस पूरे मामले में NIA जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है।
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल इस याचिका पर सुनवाई के बाद ही आगे की दिशा तय होगी। यदि अदालत जांच के लिए कोई आदेश जारी करती है तो मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है। वहीं, आरोपों की सच्चाई जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।