PM मोदी ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया, संबोधन शुरू

नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ ही 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के गनर्स ने 21 तोपों की सलामी दी। स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल करने वाली इस सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत के पास है और गन पोजीशन ऑफिसर नायब सूबेदार (गनरी में असिस्टेंट इंस्ट्रक्टर) अनुतोष सरकार हैं।


इसके बाद प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित करना शुरू कर दिया है। ध्वजारोहण के दौरान लाल किले पर राष्ट्रगान की धुन गूंजी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और भविष्य के संकल्पों का जिक्र किया। स्वतंत्रता दिवस समारोह में बड़ी संख्या में विशेष अतिथि, वीरता पुरस्कार विजेता, युवा, किसान और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजधानी में विशेष इंतजाम किए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा, "आज जो इस समारोह में उपस्थित हैं, उन सभी के लिए आज एक ऐतिहासिक पल भी है। आजादी के बाद 15 अगस्त, लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गूंज रहा है। आज जब हम देश के लोग वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो इससे बड़ा उत्तम अवसर क्या हो सकता है।"

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा, "मेरे प्यारे देशवासियों आज हम सब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आज हर दिलों की धड़कन, वंदे मातरम के नाद से गूंज रही है। आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है और देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आज आगे बढ़ रहा है। आप सबको स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।"

साथ ही कहा, "कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, तब अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है, जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है। अब छोटे सपनों से चलने वाला नहीं है। हमें बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं... हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए। जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाईयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभर कर आता है। हमारे संकल्प भी ऊंचे होने चाहिए क्योंकि जब सपने ऊंचे होते हैं, संकल्प ऊंचे होते हैं तो हमारे सामर्थ्य की ऊंचाई भी बढ़ती है, हमारे प्रयासों की ऊंचाई भी बढ़ती है और तब जाकर हम सपनों को साकार कर सकते हैं।"

 "देश आजाद हुआ, बहुत सारे सपने लेकर आजाद हुआ लेकिन हम गति नहीं पकड़ पाए, रफ्तार नहीं पकड़ पाए, होती है-चलती है, हो जाएगा-देखा जाएगा, इसी में खोए रहे। 2014 तक आते-आते तो पूरे विश्व ने हमें 'फ्रेजाइल फाइव' में डंप कर दिया था। ऐसे समय में पिछले 12 साल में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ी है। तेज गति से हम आगे बढ़ रहे हैं। देश-राज्यों का संकल्प है कि अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प को, सामर्थ्य को रोक पाना नामुमकिन है।"

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