नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक नया दावा सामने आया है। पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि मई 2025 में भारत के साथ हुए टकराव के दौरान ईरान ने उसका समर्थन किया था। इस दावे के बाद भारत, पाकिस्तान और ईरान के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, ईरान सरकार की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया सैन्य अभियान था। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य आतंकी ढांचे को नुकसान पहुंचाना था।
पाकिस्तान ने किया ईरान के समर्थन का दावा
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया कि भारत के साथ मई 2025 में हुए संघर्ष के दौरान ईरान ने पाकिस्तान का साथ दिया था। पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, ईरान ने कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया था।
इशाक डार के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान की भूमिका क्या थी। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह दावा पाकिस्तान की ओर से किया गया है और ईरान ने इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
क्या ईरान ने सीधे भारत के खिलाफ कदम उठाया?
अब तक ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है कि ईरान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा लिया हो या भारत विरोधी कोई सीधा कदम उठाया हो।
ईरान और भारत के बीच लंबे समय से कूटनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग भी रहा है। वहीं ईरान के पाकिस्तान के साथ भी ऐतिहासिक और क्षेत्रीय संबंध हैं।
मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया की राजनीति में ईरान अक्सर अपने हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्या हुआ था?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस अभियान में पाकिस्तान और PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
भारत सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई आतंकवादी संगठनों के खिलाफ थी और इसका उद्देश्य भविष्य के आतंकी हमलों को रोकना था। अभियान के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया था।
ईरान-पाकिस्तान संबंधों का पहलू
ईरान और पाकिस्तान पड़ोसी देश हैं और दोनों के बीच सीमा, व्यापार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की है।
पाकिस्तान ने कई मौकों पर ईरान के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान के समर्थन का दावा किया गया है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश के समर्थन को समझने के लिए केवल राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं होते, बल्कि आधिकारिक दस्तावेज और वास्तविक गतिविधियों को भी देखना जरूरी होता है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
अगर पाकिस्तान का दावा सही माना जाए तो यह क्षेत्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है। भारत और ईरान के बीच पुराने संबंधों को देखते हुए यह मुद्दा संवेदनशील माना जा रहा है।
हालांकि भारत ने ईरान के साथ अपने संबंधों को हमेशा रणनीतिक दृष्टि से देखा है। दोनों देशों के बीच चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी रहे हैं।
आगे क्यों बढ़ सकती है चर्चा?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद दक्षिण एशिया में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। पाकिस्तान अपने सहयोगी देशों के साथ संपर्क बढ़ाने में जुटा रहा, जबकि भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के मुद्दे को उठाया।
ईरान की भूमिका को लेकर सामने आया दावा आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है। लेकिन अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह केवल पाकिस्तान का दावा है, जिसकी ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 
फिलहाल ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ईरान की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल कूटनीतिक समर्थन तक सीमित था या इसके पीछे कोई और रणनीतिक पहलू था। आने वाले समय में अगर दोनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक बयान आता है तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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