नई दिल्ली। अफगानिस्तान में अकेले घूमने गई भारतीय ट्रैवल व्लॉगर अरुणिमा को लेकर सोशल मीडिया पर उस वक्त चिंता बढ़ गई, जब उन्होंने दावा किया कि उन्हें बामियान में 'मुजाहिदीन' ने पकड़ लिया है। उन्होंने मदद मांगते हुए भारतीय दूतावास से संपर्क कराने की अपील भी की थी। हालांकि अब खुद अरुणिमा ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि वह सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें रोका, पूछताछ की और गिरफ्तारी की चेतावनी दी थी।
केरल की रहने वाली अरुणिमा सोशल मीडिया पर 'Backpacker Arunima' के नाम से जानी जाती हैं। वह अफगानिस्तान में अकेले यात्रा कर रही थीं और अपनी यात्रा से जुड़े वीडियो तथा तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर रही थीं। इसी दौरान बामियान पहुंचने के बाद उनके साथ ऐसी घटना हुई, जिसने भारत में मौजूद उनके फॉलोअर्स और परिचितों की चिंता बढ़ा दी।
सोशल मीडिया पर मांगी थी मदद
रिपोर्ट के मुताबिक, अरुणिमा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट/स्टोरी साझा कर कहा था कि उन्हें 'मुजाहिदीन' ने पकड़ लिया है। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि अगर किसी का भारतीय दूतावास से संपर्क है तो उनकी मदद की जाए। उनकी पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से फैल गई कि भारतीय महिला व्लॉगर को अफगानिस्तान में हिरासत में ले लिया गया है।
बाद में अरुणिमा ने पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि उन्हें वास्तव में गिरफ्तार नहीं किया गया था। स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें रोका था और उनके दस्तावेजों के बारे में सवाल किए थे। इसके साथ ही अकेले यात्रा करने को लेकर भी उनसे पूछताछ हुई।
अकेले यात्रा करने पर खड़ा हुआ विवाद
अरुणिमा के अनुसार, समस्या की मुख्य वजह उनका बिना पुरुष साथी के अकेले यात्रा करना था। बामियान में अधिकारियों ने उनसे कहा कि महिला अकेले यात्रा नहीं कर सकती और उसके साथ पुरुष साथी या गाइड होना चाहिए। स्थानीय नियमों के उल्लंघन की बात कहते हुए उन्हें गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई।
अरुणिमा ने बताया कि इस स्थिति से वह काफी डर गई थीं। उन्हें लगा कि मामला गंभीर हो सकता है। इसी कारण उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए मदद मांगने का फैसला किया ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय अधिकारियों तक बात पहुंच सके।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने जलालाबाद में यात्रा के लिए जरूरी परमिट हासिल करने की कोशिश भी की थी, लेकिन पुरुष साथी नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। अरुणिमा का कहना है कि अफगानिस्तान में महिला यात्रियों के लिए अकेले घूमना बेहद मुश्किल है और कई जगह पुरुष गाइड या साथी की जरूरत पड़ती है। ([Jansatta][3])
दस्तावेजों की हुई जांच
बामियान पहुंचने के बाद स्थानीय अधिकारियों ने अरुणिमा के दस्तावेजों की जांच की। इसी दौरान उनसे उनकी यात्रा और अकेले घूमने को लेकर सवाल किए गए। अधिकारियों की ओर से गिरफ्तारी की बात सामने आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अरुणिमा ने बाद में एक स्थानीय व्यक्ति से मदद ली, जो उनकी पहले भी सहायता कर चुका था। अधिकारियों से बातचीत के बाद मामला सुलझा और उन्हें आगे की यात्रा जारी रखने की अनुमति मिल गई।
अरुणिमा ने अपने अनुभव में यह भी बताया कि घटना के दौरान वह मानसिक और शारीरिक रूप से काफी परेशान हो गई थीं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि अकेले यात्रा करने के कारण मामला इतना गंभीर हो सकता है।
अब कहां हैं अरुणिमा?
सबसे राहत की बात यह है कि अरुणिमा अब सुरक्षित हैं। उन्होंने खुद अपडेट देकर बताया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया और वह वहां से निकलने में सफल रहीं। अधिकारियों से बातचीत के बाद उन्हें अपनी आगे की यात्रा जारी रखने की अनुमति मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, वह बामियान से निकलकर उज्बेकिस्तान सीमा की ओर आगे बढ़ीं।
इस अपडेट के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर बनी चिंता काफी हद तक दूर हुई। पहले सोशल मीडिया पोस्ट से ऐसा लग रहा था कि उन्हें हिरासत में लिया गया है, लेकिन बाद में उनकी ओर से दी गई जानकारी में गिरफ्तारी की बात स्पष्ट रूप से बदली गई।
यही वजह है कि इस मामले में 'गिरफ्तार' किए जाने के बजाय 'रोके जाने और गिरफ्तारी की चेतावनी मिलने' की बात ज्यादा सटीक है।
क्यों हुआ था इतना कन्फ्यूजन?
पूरे मामले में भ्रम अरुणिमा की शुरुआती सोशल मीडिया पोस्ट के कारण पैदा हुआ। उन्होंने तनावपूर्ण परिस्थिति में मदद मांगते हुए गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी साझा की थी। बाद में सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला गिरफ्तारी तक नहीं पहुंचा था।
पीटीआई आधारित रिपोर्ट में भी कहा गया है कि उनके शुरुआती गिरफ्तारी के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी थी। इसलिए इस घटना से जुड़े दावों को अरुणिमा के स्वयं के विवरण के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
अफगानिस्तान में महिलाओं पर सख्त पाबंदियां
अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद महिलाओं की सार्वजनिक जिंदगी और आवाजाही से जुड़े कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं को कई परिस्थितियों में पुरुष अभिभावक या साथी से जुड़े नियमों का सामना करना पड़ता है।
अरुणिमा का अनुभव भी इसी तरह की पाबंदियों से जुड़ा बताया जा रहा है। उनके मुताबिक, पुरुष यात्रियों की तुलना में अकेली महिला यात्रियों के सामने कई अतिरिक्त मुश्किलें आती हैं।
हालांकि अलग-अलग स्थानों पर नियमों के क्रियान्वयन और स्थानीय अधिकारियों के व्यवहार में अंतर हो सकता है। इसलिए अफगानिस्तान की यात्रा करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए स्थानीय नियमों और आधिकारिक यात्रा सलाह की जानकारी रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
गिरफ्तारी' के दावे पर सावधानी जरूरी
इस खबर में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अरुणिमा ने शुरुआती तौर पर 'मुजाहिदीन' द्वारा पकड़े जाने या गिरफ्तारी की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने खुद स्पष्ट किया कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था। उन्हें स्थानीय अधिकारियों ने रोका और गिरफ्तारी की चेतावनी दी थी।
इसलिए यह कहना कि भारतीय व्लॉगर को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था, उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक सही नहीं होगा।
फिलहाल अरुणिमा सुरक्षित हैं और बामियान से आगे निकल चुकी हैं। उनकी इस यात्रा ने एक बार फिर अफगानिस्तान में अकेले सफर करने वाली महिला यात्रियों के सामने आने वाली चुनौतियों और स्थानीय पाबंदियों को चर्चा में ला दिया है।
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