नई दिल्ली। पिछले एक महीने से प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। खुदरा बाजार में बढ़े दामों के बीच अब देश की प्रमुख मंडियों में प्याज के थोक भाव में भी तेज उछाल देखने को मिल रहा है। सितंबर 2026 के राज्यवार थोक मूल्य आंकड़ों के अनुसार प्याज का औसत थोक भाव बढ़कर 4,249 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है। अगस्त 2026 में यही औसत कीमत 3,235 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी एक महीने में प्याज के थोक भाव में करीब 31.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महंगाई का असर केवल मासिक आधार पर ही नहीं, बल्कि सालाना तुलना में भी काफी अधिक दिखाई दे रहा है। सितंबर 2025 में प्याज का औसत थोक भाव 1,837 रुपये प्रति क्विंटल था। इस लिहाज से सितंबर 2026 में कीमतें पिछले साल के मुकाबले करीब 131.3 फीसदी अधिक हो गई हैं। प्याज के दाम में इतनी तेज बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। सब्जियों और रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की खरीदारी में प्याज की कीमत उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।
सरकार की सस्ती प्याज योजना का सीमित फायदा
प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से कई शहरों में करीब 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को बाजार की ऊंची कीमतों से राहत देना है। हालांकि, सीमित बिक्री केंद्रों और उपलब्धता के कारण इस पहल का लाभ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है।
कई शहरों में उपभोक्ताओं को सस्ते प्याज के लिए निर्धारित केंद्रों तक पहुंचना पड़ रहा है। ऐसे में बाजार में महंगा प्याज खरीदने वालों की संख्या अभी भी काफी अधिक है। सरकार की ओर से सस्ती दर पर प्याज उपलब्ध कराने की कोशिश के बावजूद थोक बाजार में कीमतों का बढ़ना चिंता बढ़ाने वाला है।
यूपी में सबसे तेज बढ़ोतरी
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में प्याज के थोक भाव में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर 2026 में यहां प्याज का औसत थोक भाव 2,923 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि अगस्त में यह 1,940 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह एक महीने में यूपी में थोक कीमतों में करीब 50.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
उत्तर प्रदेश में प्याज की कीमतों में यह उछाल खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य के बड़े शहरों और कस्बों में रोजमर्रा की खपत काफी अधिक है। थोक बाजार में दाम बढ़ने का असर आगे चलकर खुदरा कीमतों पर भी पड़ता है। इससे घरों के साथ-साथ होटल, ढाबे और छोटे खाद्य कारोबारियों के खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
पिछले साल की तुलना में दोगुने से ज्यादा भाव
प्याज की मौजूदा कीमतों की गंभीरता को समझने के लिए सालाना आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। सितंबर 2025 में औसत थोक कीमत 1,837 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर 4,249 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। यानी एक साल में औसत कीमत में 2,400 रुपये से अधिक का अंतर आया है।
सालाना आधार पर 131.3 फीसदी की बढ़ोतरी यह बताती है कि प्याज की कीमतों में बदलाव केवल हाल की तेजी तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में इसके दाम में लगातार बड़ा अंतर देखने को मिला है। थोक बाजार में कीमतें बढ़ने के बाद इसका प्रभाव खुदरा बाजार में भी दिखाई देता है और अंततः इसका भार उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।
रसोई का बजट हुआ प्रभावित
प्याज भारतीय भोजन का प्रमुख हिस्सा है। अधिकांश घरों में सब्जी, दाल, सलाद और कई अन्य व्यंजनों में इसका इस्तेमाल होता है। इसलिए प्याज के दाम बढ़ने का असर केवल एक सब्जी की कीमत तक सीमित नहीं रहता। घरेलू रसोई का कुल खर्च बढ़ने लगता है।
कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए इसका असर अधिक महसूस किया जा सकता है। पहले से ही खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर सतर्क रहने वाले उपभोक्ताओं के सामने प्याज के बढ़ते भाव ने बजट प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है। बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।
कारोबारियों पर भी बढ़ा दबाव
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। होटल, रेस्तरां, ढाबे और छोटे खाद्य कारोबारियों के लिए भी प्याज महत्वपूर्ण कच्चा माल है। थोक कीमत बढ़ने से इनके खर्च में इजाफा होता है। कारोबारियों के सामने चुनौती यह रहती है कि बढ़ी लागत को ग्राहकों पर कितना डाला जाए।
यदि कीमतों में बढ़ोतरी लंबे समय तक बनी रहती है तो खाद्य कारोबारियों के मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है। कुछ कारोबारी कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ कम करने के लिए प्याज की खपत घटाने या वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल करने का रास्ता अपना सकते हैं।
कीमतों पर नियंत्रण बड़ी चुनौती
सरकार की ओर से सस्ती दर पर प्याज उपलब्ध कराने की पहल उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देने का प्रयास है, लेकिन थोक बाजार में लगातार बढ़ते भाव कीमतों पर नियंत्रण की चुनौती को सामने ला रहे हैं। यूपी समेत कई राज्यों में थोक कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है।
सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि प्याज की महंगाई इस समय उपभोक्ताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। एक महीने में औसत थोक भाव 31.3 फीसदी बढ़ना और पिछले साल की तुलना में 131.3 फीसदी अधिक होना बाजार में कीमतों के दबाव को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश में 50.7 फीसदी की मासिक बढ़ोतरी ने स्थिति को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में मंडियों में प्याज की आवक और बाजार की स्थिति क्या रहती है। यदि आपूर्ति में सुधार होता है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल बढ़े हुए थोक भाव ने आम उपभोक्ता की रसोई और बजट दोनों की चिंता बढ़ा दी है।