महिला आरक्षण और परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी, खड़गे से संपर्क की खबर
नई दिल्ली। महिला आरक्षण को लागू करने और लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद इस संबंध में फैसला ले सकती है। संभावित विशेष सत्र को नवरात्रि के दौरान बुलाए जाने की भी चर्चा है। हालांकि, अब तक सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के कार्यालय ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से संपर्क किया है। इस संपर्क को सरकार की ओर से विपक्षी दलों के साथ संभावित विशेष सत्र और संबंधित विधेयकों पर बातचीत की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, खड़गे के कार्यालय की ओर से इस संपर्क पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेष सत्र को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?
संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सत्र का औपचारिक सत्रावसान अभी नहीं हुआ है। इसी वजह से सरकार के पास आवश्यकता पड़ने पर विशेष बैठक बुलाने का विकल्प खुला माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद विशेष सत्र को लेकर अंतिम फैसला कर सकती है।
सरकार की प्राथमिकता महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना बताई जा रही है। इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले कह चुके हैं कि 2029 के आम चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया जल्द शुरू करना जरूरी है।
पहले भी पेश हो चुके हैं संबंधित विधेयक
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधायी प्रस्ताव इस साल संसद में पहले भी लाए जा चुके हैं। अप्रैल 2026 में संसद की विशेष बैठक के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए थे। सरकार का उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया का रास्ता तैयार करना था।
हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक विशेष बहुमत हासिल नहीं हो सका। इसके बाद आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई। केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, संविधान संशोधन विधेयक को अनुच्छेद 368(2) के तहत आवश्यक बहुमत नहीं मिला और उससे जुड़े अन्य दोनों विधेयकों पर भी आगे कार्रवाई नहीं हुई।
विपक्ष की आपत्तियां
महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष के भीतर भी अलग-अलग राय रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन किया है, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया और विधेयक को आगे बढ़ाने के तरीके को लेकर आपत्तियां जताई हैं। अप्रैल में विपक्षी दलों ने सरकार के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा था कि महिला आरक्षण और परिसीमन को जिस तरीके से जोड़ा जा रहा है, उस पर व्यापक चर्चा जरूरी है।
जुलाई में भी खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। कांग्रेस का कहना रहा है कि किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव से पहले राजनीतिक दलों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श होना चाहिए।
2029 के चुनाव पर नजर
महिला आरक्षण के प्रस्ताव का सीधा संबंध 2029 के लोकसभा चुनावों से जोड़ा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया समय रहते पूरी हो। इसके लिए परिसीमन को आवश्यक चरण माना जा रहा है। रिजिजू ने अगस्त में कहा था कि यदि परिसीमन प्रक्रिया में देरी होती है तो महिला आरक्षण के लागू होने में भी देरी हो सकती है।
परिसीमन का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों के आवंटन में पुनर्समायोजन करना है। प्रस्तावित बदलावों को लेकर कई राज्यों और राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी चिंताएं हैं। खास तौर पर दक्षिणी राज्यों में यह आशंका जताई गई है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण से राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
नवरात्रि में विशेष सत्र की चर्चा
सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार नवरात्रि के दौरान विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। इस साल नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने वाली है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और अवधि को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सरकार पहले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष का रुख महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को पारित कराने के लिए सामान्य विधेयक की तुलना में अधिक व्यापक समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में सरकार के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत और सहमति बनाने की कोशिश अहम मानी जा रही है।
फिलहाल विशेष सत्र को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर सत्र बुलाने की घोषणा नहीं की है और अंतिम निर्णय का इंतजार है। लेकिन महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दों पर केंद्र की सक्रियता तथा विपक्ष से संपर्क की खबरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक संसद के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।