नई दिल्ली, 14 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की गई तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और सीबीएसई से जवाब मांगा है। अदालत ने सभी पक्षों को 10 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने सीबीएसई की नई भाषा नीति को लेकर कई सवाल उठाए और कहा कि इसके लागू होने से छात्रों, स्कूलों और शिक्षकों के सामने कई व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
याचिकाओं में सीबीएसई की उस नीति को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। इसमें यह प्रावधान है कि छात्रों को कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं पढ़नी होंगी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूलों के संसाधन, भाषा विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता और छात्रों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में सभी छात्रों पर एक समान भाषा नीति लागू करने से कई कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी चिंता जताई कि कई स्कूलों में अतिरिक्त भाषाओं को पढ़ाने के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा नई भाषा की किताबों और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि नीति लागू करने से पहले स्कूलों की तैयारियों और छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखना जरूरी है।
सीबीएसई की तीन भाषा नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत भाषा शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। नीति का उद्देश्य छात्रों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि अधिक भाषाओं का ज्ञान छात्रों के बौद्धिक विकास और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करता है।
हालांकि, इस नीति को लेकर कुछ राज्यों और शिक्षा विशेषज्ञों ने पहले भी चिंता जताई है। विरोध करने वालों का कहना है कि भाषा का चयन छात्रों और राज्यों की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। उनका तर्क है कि किसी भी भाषा को अनिवार्य बनाने से छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव बढ़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है। अदालत ने केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और सीबीएसई से जवाब मांगा है ताकि सभी पक्षों की राय सामने आ सके। अब 29 जुलाई को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या निर्देश देती है।
सीबीएसई की भाषा नीति को लेकर यह मामला शिक्षा व्यवस्था में भाषा के इस्तेमाल और छात्रों की पसंद से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।