नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी और जमीन सौदे विवाद को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद **संजय सिंह** ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े मामले में SIT रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच में **चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीनचिट दिए जाने** की बात सामने आ रही है, लेकिन यह कैसे संभव है, इस पर वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
संजय सिंह ने कहा कि अगर जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई तो वह अपने पास मौजूद दस्तावेजों और तथ्यों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने SIT को कई दस्तावेज सौंपने की बात भी कही है।
SIT रिपोर्ट को लेकर उठे सवाल
राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, SIT की फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम आरोपी के रूप में शामिल नहीं किया गया है।
इसके बाद AAP सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब मामले में जांच चल रही थी और सुप्रीम कोर्ट भी प्रगति रिपोर्ट पर नजर रख रहा है, तो फिर क्लीनचिट कैसे दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट और सार्वजनिक रूप से सामने आ रही जानकारी में अंतर है, जिसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
संजय सिंह ने मांगे जांच टीम से मिलने का समय
संजय सिंह ने SIT अध्यक्ष को ईमेल भेजकर मिलने का समय मांगा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास जमीन सौदे और कथित अनियमितताओं से जुड़े 26 दस्तावेज हैं, जिन्हें वह जांच टीम को सौंपना चाहते हैं।
उनका कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।
जमीन सौदे को लेकर लगाए आरोप
संजय सिंह ने पहले भी राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ जमीन सौदों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ जमीनों की खरीद प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं।
उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जिन पर चंपत राय और अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
चंपत राय और अनिल मिश्रा को मिली राहत
SIT रिपोर्ट में नाम नहीं आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा को बड़ी राहत मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसी को दोनों के खिलाफ आरोप साबित करने वाले पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
हालांकि, संजय सिंह का कहना है कि जांच अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है और वह न्यायिक प्रक्रिया के जरिए अपनी बात रखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में मामला क्यों पहुंच सकता है?
संजय सिंह का कहना है कि अगर जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही तो वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उनका तर्क है कि इतने गंभीर मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ जांच होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी इस मामले में जांच की प्रगति को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने SIT को जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के निर्देश दिए थे।
ट्रस्ट और जांच प्रक्रिया पर नजर
राम मंदिर से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। मंदिर निर्माण और श्रद्धालुओं से मिले चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का असर व्यापक स्तर पर पड़ता है।
इसी वजह से जांच प्रक्रिया, रिपोर्ट और उससे जुड़े फैसलों पर लगातार नजर बनी हुई है।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
SIT रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्षी दल जहां जांच को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट से जुड़े लोगों को मिली राहत का भी जिक्र किया जा रहा है।
अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि SIT के सामने संजय सिंह द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और उनके दावों पर क्या कार्रवाई होती है।
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