फर्जी ED नोटिस और करोड़ों की डील युवराज मनचंदा केस में नया खुलासा
ED के नाम पर फर्जी नोटिस WhatsApp चैट
नई दिल्ली: फर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ED) नोटिस के जरिए करोड़ों रुपये की कथित ठगी से जुड़े मामले में युवराज मनचंदा का नाम चर्चा में है। मामले की जांच के दौरान सामने आई WhatsApp चैट ने कथित वसूली के तरीके को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चैट में पैसे की मांग करते हुए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों और पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
मामले में आरोप है कि ED जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी नोटिस तैयार किया गया और कार्रवाई का डर दिखाकर मोटी रकम मांगी गई। कथित तौर पर नोटिस को इस तरह तैयार किया गया था कि पहली नजर में वह आधिकारिक दस्तावेज जैसा दिखाई दे। इसी का फायदा उठाकर संबंधित लोगों पर पैसे देने का दबाव बनाया गया। जांच के दौरान सामने आई कथित WhatsApp चैट ने मामले को नया मोड़ दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक चैट में पैसे की मांग को लेकर लगातार दबाव बनाया गया। इसी बातचीत में कथित तौर पर “पत्नी बेचो... लेकिन पैसे दो” जैसी आपत्तिजनक बात भी लिखी गई। जांच एजेंसियों के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि ये संदेश किस नंबर से भेजे गए और संबंधित मोबाइल नंबर तथा बैंक खातों का आपस में क्या संबंध है।
युवराज मनचंदा के मामले में पुलिस कथित फर्जी ED नोटिस के स्रोत का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह है कि नोटिस किसने बनाया, उसमें सरकारी एजेंसी से संबंधित जानकारी कहां से हासिल की गई और उसे पीड़ित तक किस माध्यम से पहुंचाया गया। डिजिटल दस्तावेजों की तकनीकी जांच से इस संबंध में अहम जानकारी सामने आ सकती है।
इसके साथ ही करोड़ों रुपये के कथित लेनदेन की जांच भी की जा रही है। रकम किन खातों में भेजी गई, आगे उसे कहां ट्रांसफर किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, WhatsApp चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
फर्जी सरकारी नोटिस के जरिए ठगी के मामलों में अपराधी आमतौर पर गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त होने या जांच एजेंसी की कार्रवाई का डर दिखाते हैं। ऐसे किसी नोटिस या ऑनलाइन मांग पर संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना जरूरी है। ED भी समय-समय पर अपने नाम का इस्तेमाल कर होने वाली धोखाधड़ी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह देता रहा है। फिलहाल इस मामले में सामने आए आरोपों और कथित WhatsApp चैट की प्रामाणिकता सहित पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत होने से पहले आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।