नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में 80वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेटों ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी।

समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि राष्ट्र केवल अपने गौरव को याद रखने से महान नहीं बनते, बल्कि अपनी पीड़ा को याद रखना भी आवश्यक है, ताकि इतिहास की ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के उत्सव के साथ हमें भारत विभाजन की पीड़ा को भी स्मरण करना चाहिए। उन्होंने विभाजन को आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताते हुए कहा कि इस दौरान लाखों लोगों की हत्या हुई और करीब डेढ़ करोड़ लोगों को अपने पुरखों के घर और जमीन छोड़ने पड़े। यह ऐसा विभाजन और पलायन था, जिसकी पहले से कोई तैयारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 15 अगस्त को खुद लाहौर को भी पता नहीं था कि वह भारत में है या पाकिस्तान में।

कुलपति ने कहा कि इतिहास को याद रखना इसलिए जरूरी है, ताकि ऐसी पीड़ादायक घटना भारत और उसके बच्चों के साथ दोबारा कभी न घटे। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता दिवस उन स्वतंत्रता सेनानियों को कृतज्ञ मन और नम आंखों से नमन करने का अवसर है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके जीवन में स्वहित से ऊपर राष्ट्रहित की भावना थी।

प्रो. सिंह ने कहा कि भारत की सभ्यता मूल रूप से कर्तव्य आधारित सभ्यता रही है, लेकिन समय के साथ लोग केवल अधिकारों की भाषा बोलने लगे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपना कर्तव्य निभाता है तो दूसरे के अधिकारों की रक्षा स्वतः हो जाती है। कर्तव्यों का पालन नहीं होने पर ही संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया होता तो क्या भारत आजाद हो पाता?

कुलपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में विश्वविद्यालय समुदाय को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय को विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में शामिल कराने के लक्ष्य के लिए भी सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

समारोह में डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता, शैक्षणिक कार्य अधिष्ठाता प्रो. के. रत्नाबली, एनसीसी समन्वयक मेजर प्रो. संजय कुमार सहित अनेक डीन, विभागाध्यक्ष, प्राचार्य, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और हजारों विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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