नई दिल्ली: दिल्ली सरकार राजधानी में पेइंग गेस्ट (PG) अकोमोडेशन को रेगुलेट करने के लिए एक व्यापक पॉलिसी पर काम कर रही है। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने छात्रों की सुरक्षा और किराए के नियमन को बेहतर बनाने के लिए कई प्रस्तावित उपायों की रूपरेखा तैयार की है। प्रस्तावित पॉलिसी के तहत, PG चलाने वालों को अपना काम शुरू करने से पहले PG ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना होगा और पुलिस व नगर निगम से वेरिफिकेशन करवाना होगा।
प्रस्तावित नियमों के तहत PG अकोमोडेशन के एंट्री गेट और कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाना भी ज़रूरी होगा और इनकी रिकॉर्डिंग 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी।जिन PG में 15 या उससे ज़्यादा छात्र रहते हैं, वहां संचालकों को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच एक लाइसेंस्ड नाइट गार्ड रखना होगा। विज़िटर रजिस्टर रखना भी ज़रूरी होगा, जबकि बाहर के लोगों को सुबह 8 बजे से रात 9 बजे के बीच ही आने की इजाज़त होगी।
पॉलिसी के तहत हर PG में एक वार्डन का होना भी ज़रूरी होगा, जो या तो उसी जगह पर रहता हो या 500 मीटर के दायरे में उसका ऑफिस हो। इमरजेंसी की स्थिति में वार्डन को 15 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचना होगा।मनमाने और ज़्यादा किराए की चिंताओं को दूर करने के लिए, प्रस्तावित पॉलिसी में एक किराया नियमन समिति (Rent Regulation Committee) बनाने की बात कही गई है, जो अलग-अलग इलाकों के लिए किराए की सीमा तय करेगी।
किराए की सीमा तय करते समय ऑक्यूपेंसी लेवल, दी जाने वाली सुविधाओं, मौजूदा मार्केट रेट और कॉलेज व पब्लिक ट्रांसपोर्ट से PG की दूरी जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में एक 'संस्थागत आवास समिति' (Institutional Accommodation Committee) बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसमें कॉलेज के अधिकारी, छात्र प्रतिनिधि, नगर निगम का प्रतिनिधि और पुलिस संपर्क अधिकारी शामिल होंगे।
इस समिति का मकसद शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों और सरकारी एजेंसियों के बीच आवास से जुड़े मुद्दों पर बेहतर तालमेल बिठाना है।
यह प्रस्तावित पॉलिसी हाल ही में सत्य निकेतन में PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही एक इमारत के ढहने की घटना के बाद आई है। इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई थी और इसके बाद छात्रों के आवास और PG के तौर पर इस्तेमाल होने वाली इमारतों की सुरक्षा की नए सिरे से जांच-पड़ताल शुरू हुई थी। दिल्ली सरकार ने प्रमुख PG हब में इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की भी घोषणा की है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सरकार एक ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रही है जिसके तहत PG अकोमोडेशन समेत सार्वजनिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और सुरक्षा सर्टिफिकेशन करवाना ज़रूरी होगा। सरकार खाली पड़ी सरकारी प्रॉपर्टीज़ का इस्तेमाल छात्रों के रहने की जगह के तौर पर करने की संभावना पर भी विचार कर रही है, साथ ही दिल्ली के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने पर भी बातचीत चल रही है।
प्रस्तावित PG फ्रेमवर्क का मकसद बड़ी संख्या में छात्रों को सुविधा देने वाले संस्थानों को एक बेहतर रेगुलेटरी सिस्टम के तहत लाना है, ताकि ऑपरेटर्स की जवाबदेही बढ़े और वहाँ रहने वालों की सुरक्षा बेहतर हो सके।