नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों ने अपने साथियों के साथ कथित पुलिस मारपीट और हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर नाराजगी जताई। इस दौरान उन्होंने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण विरोध करने वाले अपने साथियों और नागरिकों के प्रति एकजुटता व्यक्त करना है।
वकीलों का यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विरोध जारी है। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कुछ वकीलों को हिरासत में लिए जाने और कथित तौर पर बल प्रयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी वकीलों के खिलाफ कथित अत्यधिक पुलिस बल के इस्तेमाल और हिरासत की घटनाओं की निंदा की थी।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में एकत्र हुए वकीलों ने संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया। उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। अधिवक्ताओं ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि शांतिपूर्ण तरीके से असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रदर्शन में शामिल एक वकील ने बताया कि यह कार्यक्रम उन अधिवक्ताओं और नागरिकों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आयोजित किया गया है, जिनके खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल होने के दौरान कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि वकील संविधान और कानून के शासन में विश्वास रखते हैं तथा उसी के अनुरूप अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं।
वकीलों ने कहा कि उनका विरोध केवल अपने पेशे से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन नागरिकों के साथ भी एकजुटता व्यक्त करने का प्रयास है, जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की असहमति और विरोध को संवैधानिक अधिकारों के दायरे में देखा जाना चाहिए।
इससे पहले 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अंतरिम निर्देश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि शांतिपूर्ण और निहत्थे तरीके से एकत्र होने वाले लोगों को गैरकानूनी रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं पहुंचाने का निर्देश भी दिया था।
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद बना हुआ है। प्रदर्शनकारी पक्ष ने हिरासत और कथित बल प्रयोग पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक आवाजाही बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई की वैधता और परिस्थितियां न्यायिक जांच का विषय हो सकती हैं।
वकीलों के विरोध प्रदर्शन में संविधान की प्रस्तावना पढ़ना कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। अधिवक्ताओं ने कहा कि वे संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने के साथ अपने उन साथियों का समर्थन कर रहे हैं, जिनके खिलाफ कथित कार्रवाई हुई है।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में मंगलवार को हुए इस प्रदर्शन ने दिल्ली में चल रहे आंदोलन के बीच वकीलों की चिंताओं को भी सामने रखा है। अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान पर जोर दिया। हालांकि, पुलिस द्वारा कथित मारपीट के व्यक्तिगत आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है।