Delhi दिल्ली। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश में भूमि रिकॉर्ड की व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में जमीन को केवल संपत्ति के एक टुकड़े के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि लोगों का अपनी भूमि से भावनात्मक जुड़ाव भी होता है। उन्होंने मैनुअल तरीके से भूमि रिकॉर्ड रखने की पुरानी व्यवस्था में आने वाली समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आम नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी तक भूमि से संबंधित रिकॉर्ड मैनुअल तरीके से रखे जाते रहे हैं। इस व्यवस्था के कारण लोगों को अपने दस्तावेज हासिल करने और रिकॉर्ड से संबंधित काम कराने के लिए बार-बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इससे लोगों का समय भी बर्बाद होता था और उन्हें कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था।
केंद्रीय मंत्री ने भूमि रिकॉर्ड में कथित हेरफेर की संभावना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रिकॉर्ड संभालने वाला व्यक्ति उसमें बदलाव कर सकता था और रामलाल की जगह श्यामलाल का नाम दर्ज हो सकता था। ऐसी परिस्थितियों में वास्तविक भूमि मालिकों के सामने गंभीर समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती थी।
उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़ा मामला नागरिकों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। भूमि केवल आर्थिक संपत्ति नहीं है, बल्कि कई परिवारों के लिए यह पीढ़ियों से चली आ रही विरासत और आजीविका का महत्वपूर्ण साधन भी है। ऐसे में भूमि रिकॉर्ड में किसी तरह की गलती या हेरफेर सीधे लोगों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
शिवराज सिंह चौहान ने पुराने रिकॉर्ड हासिल करने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को दस्तावेज लेने के लिए बार-बार कार्यालय जाना पड़ता था। रिकॉर्ड में त्रुटि होने की स्थिति में उसे ठीक करवाने की प्रक्रिया भी लोगों के लिए मुश्किल हो सकती थी।
केंद्रीय मंत्री के बयान ने भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था में पारदर्शिता, सटीकता और नागरिकों को आसानी से दस्तावेज उपलब्ध कराने की जरूरत को रेखांकित किया है। भूमि से संबंधित रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण और डिजिटल व्यवस्था के विस्तार से दस्तावेजों तक पहुंच आसान बनाने तथा हेरफेर की गुंजाइश कम करने में मदद मिल सकती है।
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