नई दिल्ली/मुजफ्फरनगर :  प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए करोड़ों बैंक खाते लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं। लोकसभा में सोमवार को पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि देशभर में 15,31,94,561 प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) खाते निष्क्रिय हो चुके हैं। सरकार ने इन खातों को दोबारा सक्रिय करने के लिए बैंकों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मुजफ्फरनगर से समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र सिंह मलिक, कैराना सांसद इकरा चौधरी के अलावा सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, देवेश शाक्य, लालजी वर्मा और नीरज मौर्य ने देश में निष्क्रिय जनधन खातों की संख्या, बीमा दावों और खातों से जुड़ी अन्य जानकारियों को लेकर सवाल किए थे। इन सवालों के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जानकारी सदन में पेश की।

वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी बचत या चालू खाते को तब निष्क्रिय या सुस्त माना जाता है, जब उसमें लगातार दो साल से अधिक समय तक ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन नहीं किया जाता। इसी आधार पर देशभर में बड़ी संख्या में जनधन खाते निष्क्रिय श्रेणी में पहुंच गए हैं।

सरकार की ओर से बताया गया कि निष्क्रिय खातों की संख्या कम करने और उन्हें फिर से चालू कराने के लिए बैंकों को प्रक्रिया आसान बनाने के निर्देश दिए गए हैं। खाताधारकों की सुविधा के लिए वीडियो ग्राहक पहचान प्रक्रिया (V-CIP), मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से केवाईसी (KYC) अपडेट करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि खाताधारक बिना परेशानी के अपने पुराने खातों को दोबारा सक्रिय करा सकें।

लोकसभा में सांसदों ने जनधन खातों से जुड़े दुर्घटना बीमा दावों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। सरकार ने बताया कि रुपे डेबिट कार्ड धारकों के दुर्घटना बीमा दावों से संबंधित आंकड़े संसदीय क्षेत्र के स्तर पर केंद्रीय रूप से उपलब्ध नहीं रखे जाते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में पिछले चार वित्तीय वर्षों के दौरान कुछ दावे ऐसे रहे हैं, जिन्हें नियमों के तहत खारिज किया गया।

सरकार के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्ष 2021-22 में दो दुर्घटना बीमा दावे खारिज हुए। वहीं वित्तीय वर्ष 2022-23 में एक, 2023-24 में दो और 2024-25 में तीन दावे अस्वीकार किए गए। इन दावों को खारिज करने की मुख्य वजह दुर्घटना की तारीख से पहले पिछले 90 दिनों में रुपे डेबिट कार्ड से कम से कम एक सफल वित्तीय या गैर-वित्तीय लेनदेन नहीं होना बताया गया।

वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए खातों में किसी तरह का शुरुआती शुल्क या न्यूनतम बैलेंस रखने की आवश्यकता नहीं होती। बैंकों द्वारा छिपे हुए शुल्क के नाम पर की जाने वाली कटौती से जुड़ी शिकायतों का कोई केंद्रीय स्तर पर अलग से आंकड़ा नहीं रखा जाता है।

सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने मुजफ्फरनगर, इकरा चौधरी ने कैराना, बाबू सिंह कुशवाहा ने जौनपुर, देवेश शाक्य ने एटा, लालजी वर्मा ने अंबेडकरनगर और नीरज मौर्य ने आंवला संसदीय क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों की जानकारी मांगी थी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि संसदीय क्षेत्रवार निष्क्रिय खातों और बीमा दावों का अलग-अलग डेटा केंद्रीय रूप से उपलब्ध नहीं है।

प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इसके तहत देशभर में करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए थे, ताकि उन्हें बैंकिंग सेवाओं, सरकारी योजनाओं और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) से जोड़ा जा सके। अब सरकार का जोर इन निष्क्रिय खातों को दोबारा सक्रिय कराने और खाताधारकों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय भागीदारी बढ़ाने में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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