New Delhi : बच्चों और युवाओं को तंबाकू की लत से बचाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के क्षेत्र को नशामुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। योजना के तहत स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में सिगरेट, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने का प्रावधान किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता से दूर रखना और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।
स्कूलों के आसपास होगी सख्त निगरानी
प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा स्कूलों के आसपास की दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की निगरानी की जाएगी। यदि कोई दुकानदार नियमों का उल्लंघन करते हुए तंबाकू उत्पाद बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
इस अभियान के तहत स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
बच्चों को तंबाकू से बचाना लक्ष्य
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में तंबाकू का सेवन शुरू करने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे और किशोर आसानी से आसपास के माहौल से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकना बेहद जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल परिसर और आसपास का वातावरण बच्चों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक होना चाहिए।
दुकानदारों को दी जाएगी जानकारी
प्रशासन की ओर से दुकानदारों को नियमों की जानकारी देने और जागरूक करने का अभियान भी चलाया जा सकता है। उन्हें बताया जाएगा कि शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री कानून के खिलाफ है।
जरूरत पड़ने पर उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
तंबाकू नियंत्रण कानून के तहत कार्रवाई
देश में तंबाकू नियंत्रण के लिए बनाए गए कानूनों के तहत शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री और प्रचार पर पहले से कई प्रतिबंध लागू हैं। नई पहल का उद्देश्य इन नियमों को और प्रभावी तरीके से लागू करना है।
छात्रों में बढ़ाई जाएगी जागरूकता
नशामुक्त क्षेत्र बनाने के साथ-साथ स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। छात्रों को तंबाकू के नुकसान, स्वास्थ्य पर प्रभाव और नशे से बचने के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
अभिभावकों और समाज की भूमिका अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को भी बच्चों को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
निष्कर्ष
स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के क्षेत्र को नशामुक्त बनाने की पहल बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सिगरेट, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता रोककर युवाओं को नशे की शुरुआत से बचाने में मदद मिल सकती है। प्रभावी निगरानी और जागरूकता के साथ यह अभियान अधिक सफल बनाया जा सकता है।

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