E20 पेट्रोल को लेकर सरकार की चेतावनी, BS-III वाहनों में बदलाव संभव

Update: 2026-07-29 11:36 GMT

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि 1 अप्रैल 2005 के बाद पेश की गई और वर्ष 2016 से पहले निर्मित कुछ BS-III श्रेणी की गाड़ियों में E20 फ्यूल (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के इस्तेमाल के दौरान कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुराने वाहनों में इस्तेमाल किए गए कुछ कंपोनेंट्स पर E20 पेट्रोल के प्रभाव को देखते हुए तकनीकी बदलाव की आवश्यकता हो सकती है।

E20 फ्यूल को लेकर सरकार की जानकारी

E20 फ्यूल में पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना, पर्यावरण प्रदूषण घटाना और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है।

हालांकि, पुराने वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इंजन तकनीक को देखते हुए E20 फ्यूल के प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसी संबंध में राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने वाहनों के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

पुराने वाहनों के पार्ट्स पर असर

नितिन गडकरी ने बताया कि 1 अप्रैल 2005 के बाद बाजार में आई और 2016 से पहले बनी BS-III गाड़ियों में कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट ऐसे हो सकते हैं, जिन पर E20 फ्यूल का असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कुछ वाहनों में इन पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, यह सभी वाहनों पर लागू नहीं होगा, बल्कि यह वाहन के मॉडल, निर्माण तकनीक और इस्तेमाल किए गए कंपोनेंट्स पर निर्भर करेगा।

माइलेज को लेकर कंपनियों ने दी जानकारी

E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन के माइलेज में संभावित कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इस पर मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल कंपनियों और वाहन एवं इंजन परीक्षण एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता।

उन्होंने बताया कि वाहन का माइलेज कई अन्य कारणों से भी प्रभावित होता है। इनमें वाहन की स्थिति, ड्राइविंग का तरीका, सड़क की परिस्थितियां, रखरखाव और अन्य तकनीकी पहलू शामिल हैं।

E20 अपनाने की दिशा में बढ़ रहा देश

भारत सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के उपाय के रूप में देखा जा रहा है।

E20 फ्यूल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और नए वाहनों को इस ईंधन के अनुकूल बनाने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियां भी तकनीकी बदलाव कर रही हैं।

नए वाहनों में E20 के अनुकूल तकनीक

ऑटोमोबाइल कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसे वाहन तैयार किए हैं, जो E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए अधिक उपयुक्त हैं। नए वाहनों में ईंधन प्रणाली और इंजन के कुछ हिस्सों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से प्रदर्शन पर कम असर पड़े।

वहीं, पुराने वाहनों के मालिकों को अपने वाहन के मॉडल और निर्माता की सलाह के अनुसार आवश्यक कदम उठाने की जरूरत हो सकती है।

पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा कदम

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। भारत पेट्रोलियम ईंधन की अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में घरेलू स्तर पर तैयार इथेनॉल के इस्तेमाल से आयात खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, इथेनॉल को अपेक्षाकृत कम प्रदूषण वाला ईंधन माना जाता है, जिससे उत्सर्जन में कमी लाने में सहायता मिल सकती है।

वाहन मालिकों के लिए जरूरी जानकारी

विशेषज्ञों का कहना है कि BS-III या पुराने वाहनों के मालिकों को E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से पहले अपने वाहन निर्माता की सलाह लेनी चाहिए। यदि किसी वाहन में ईंधन प्रणाली से जुड़े पुराने रबर पार्ट्स हैं, तो उनकी जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

सरकार के बयान से यह स्पष्ट है कि E20 फ्यूल को लेकर पुराने वाहनों के मामले में तकनीकी सावधानी बरतने की जरूरत है। हालांकि, सभी BS-III वाहनों में बदलाव जरूरी होगा, ऐसा नहीं कहा गया है।

कुल मिलाकर, E20 फ्यूल की शुरुआत के साथ नए और पुराने वाहनों की तकनीकी अनुकूलता एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। सरकार और वाहन निर्माता कंपनियां इसके लिए दिशा-निर्देश और तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने पर काम कर रही हैं।

Tags:    

Similar News