नई दिल्ली : NEET पेपर लीक मामले और छात्रों की मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच बातचीत को लेकर नया विवाद सामने आया है। सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत की पहल किए जाने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। जहां सरकार का कहना है कि वह छात्रों की समस्याओं को सुनने और समाधान निकालने के लिए तैयार है, वहीं CJP ने सरकार के बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
CJP की ओर से दावा किया गया है कि पिछले 24 घंटे के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में बातचीत के लिए संगठन को चार बार प्रस्ताव भेजा गया। हालांकि, संगठन ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कहा कि बातचीत के लिए स्थान ऐसा होना चाहिए जहां प्रदर्शनकारी छात्रों को सहज महसूस हो।
CJP ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है कि बातचीत जंतर-मंतर पर या किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी आवाज को उसी स्थान से सुना जाना चाहिए जहां वे आंदोलन कर रहे हैं।
वहीं, सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकार गंभीर है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। सरकार का पक्ष है कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
NEET पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कुछ समय से देशभर में छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।
CJP लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। संगठन का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
इस बीच सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन के बीच बातचीत को लेकर गतिरोध बना हुआ है। सरकार जहां अपने स्तर पर संवाद की कोशिश कर रही है, वहीं CJP अपनी शर्तों के साथ बातचीत के लिए तैयार होने की बात कह रही है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा लगातार गर्माया हुआ है। विपक्षी दलों ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। संसद के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामा देखने को मिल रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और CJP के बीच बातचीत कब और किस स्थान पर होती है। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित होता है तो छात्रों की मांगों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आगे की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल बातचीत को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद जारी है।