नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पिछले कुछ दिनों से गिरावट के दौर से गुजर रही दोनों कीमती धातुओं में अब मजबूती लौटती नजर आ रही है। शुक्रवार, 18 सितंबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के भाव में उछाल दर्ज किया गया।

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 26 डॉलर की तेजी के साथ 4400 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता नजर आया। वहीं, चांदी की कीमतों में भी मजबूत तेजी देखने को मिली और इसमें करीब 1.70 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया।

कमेक्स (COMEX) बाजार में चांदी की कीमत 67 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

MCX पर भी सोना-चांदी के दाम बढ़े

घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने और चांदी में तेजी का रुख देखने को मिला। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 2094 रुपये महंगा होकर 1,54,344 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी में भी बड़ी तेजी दर्ज की गई। चांदी की कीमत 3022 रुपये बढ़कर 2,41,050 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।

बाजार में आई इस तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और निवेशकों की बढ़ती सतर्कता के कारण सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ रही है।

भू-राजनीतिक तनाव का असर

आमतौर पर जब दुनिया के किसी हिस्से में राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक जोखिम वाले विकल्पों से दूरी बनाकर सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ाते हैं। सोना लंबे समय से ऐसे समय में सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता रहा है।

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में चिंता का माहौल बना हुआ है। इसका सीधा असर कीमती धातुओं की मांग पर पड़ रहा है। निवेशक अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए सोने और चांदी में निवेश बढ़ा रहे हैं।

त्योहारों के सीजन में बढ़ सकती है मांग

भारत में आने वाले महीनों में त्योहारों और शादी के सीजन को देखते हुए सोने और चांदी की मांग बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है। नवरात्रि, दीपावली और शादी-विवाह के समय भारत में सोने की खरीदारी पारंपरिक रूप से बढ़ जाती है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर आने वाले दिनों में कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों पर नजर

सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेडरल रिजर्व की नीतियों का भी प्रभाव पड़ता है। ब्याज दरों में बदलाव, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर निवेशकों की रणनीति बदलती रहती है।

अगर आने वाले समय में वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, बाजार में किसी भी बड़े बदलाव के लिए निवेशकों को आर्थिक संकेतकों पर नजर रखनी होगी।

आगे क्या संकेत दे रहे हैं बाजार

विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल सोने और चांदी में तेजी का रुख मजबूत दिखाई दे रहा है। मिडिल ईस्ट तनाव, वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों की मांग के कारण कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

बाजार जानकारों का कहना है कि निवेशकों को तेजी के दौर में सावधानी बरतनी चाहिए और निवेश से पहले बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है।

फिलहाल 18 सितंबर को सोना और चांदी दोनों ही मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। वैश्विक परिस्थितियां और घरेलू मांग आने वाले दिनों में इन कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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