नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की 150 वर्षों से अधिक पुरानी विरासत को समर्पित एक खास मुलाकात राष्ट्रपति भवन में हुई। पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पार्श्व गायक हरिहरन ने अपने परिवार की चार पीढ़ियों के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को 'द एंथम – वंदे मातरम्' (The Anthem – Vande Mataram) के विशेष विनाइल संस्करण और उसे बजाने के लिए तैयार किए गए टर्नटेबल की भेंट दी। हरिहरन ने इस मुलाकात को अपने परिवार के लिए अत्यंत सम्मानजनक और अविस्मरणीय क्षण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति के साथ तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि संगीत के माध्यम से देश के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करना उनके लिए गर्व का विषय है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले हरिहरन और उनका परिवार
प्रसिद्ध गायक हरिहरन ने बुधवार को सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति भवन में हुई अपनी मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं।उन्होंने बताया कि उनके परिवार की चार पीढ़ियों को एक साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ।हरिहरन के अनुसार, यह मुलाकात केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाला अवसर था।राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान परिवार ने उन्हें विशेष रूप से तैयार किया गया 'वंदे मातरम्' का विनाइल रिकॉर्ड भेंट किया।इसके साथ एक विशेष टर्नटेबल भी प्रस्तुत किया गया, ताकि राष्ट्रीय गीत की इस संगीत प्रस्तुति को पारंपरिक रिकॉर्ड माध्यम पर सुना जा सके।हरिहरन ने राष्ट्रपति के सौहार्दपूर्ण व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि यह अनुभव उनके परिवार की यादों में हमेशा जीवित रहेगा।
चार पीढ़ियों के लिए यादगार बना ऐतिहासिक पल
हरिहरन ने अपनी पोस्ट में बताया कि राष्ट्रपति भवन में परिवार की चार पीढ़ियों की मौजूदगी ने इस मुलाकात को और विशेष बना दिया।इस अवसर पर उनकी मां और प्रसिद्ध कर्नाटक संगीतज्ञ अलमेलु मणि भी मौजूद थीं।हरिहरन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उनकी मां के प्रति दिखाए गए स्नेह और आत्मीयता का विशेष उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से मिले सम्मान और आशीर्वाद ने उनकी संगीत यात्रा को एक नया भावनात्मक अर्थ दिया।गायक ने इस मुलाकात को ऐसा अनुभव बताया, जिसे उनका परिवार जीवनभर संजोकर रखेगा।संगीत की परंपरा से जुड़े परिवार के लिए राष्ट्रीय गीत का विशेष संस्करण राष्ट्रपति को भेंट करना सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर रहा।
'संगीत देश के लिए हमारी विनम्र भेंट है'
हरिहरन ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अपने विचार साझा करते हुए संगीत को देश के प्रति अपनी विनम्र भेंट बताया।उन्होंने कहा कि कलाकार के लिए संगीत केवल पेशा नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को व्यक्त करने का माध्यम भी है।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले सम्मान को उन्होंने अपने परिवार और संगीत यात्रा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना।हरिहरन ने कहा कि अपने प्रियजनों की मौजूदगी में राष्ट्रपति का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट का समापन 'वंदे मातरम्' के साथ किया।उनकी इस पहल को भारतीय संगीत की परंपरा और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
121 साल बाद विनाइल रिकॉर्ड पर वंदे मातरम् की नई प्रस्तुति
'द एंथम – वंदे मातरम्' का विशेष विनाइल एल्बम 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में औपचारिक रूप से जारी किया गया था।इस आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक संगीत यात्रा को आधुनिक पीढ़ी के सामने नए स्वरूप में प्रस्तुत करना है।वर्ष 1905 में 'वंदे मातरम्' का शुरुआती ग्रामोफोन रिकॉर्ड तैयार हुआ था। लगभग 121 वर्ष बाद इस गीत को विशेष विनाइल एल्बम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।इस आयोजन में प्रसिद्ध संगीतज्ञ अलमेलु मणि, गायक हरिहरन और गीतकार प्रसून जोशी सहित संगीत एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की कई हस्तियां शामिल हुई थीं।इस पहल को सेंटर फॉर ग्रामोफोन एंड अलाइड स्टडीज (CeGRAMS) से भी जोड़ा गया है।विनाइल रिकॉर्ड के माध्यम से भारतीय संगीत की पुरानी रिकॉर्डिंग परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी वंदे मातरम् की रचना
'वंदे मातरम्' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।इस गीत की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी।इसके बाद गीत को उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया, जिसका प्रकाशन 1882 में हुआ।गीत में मातृभूमि के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण की भावना व्यक्त की गई है।स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और ब्रिटिश शासन के विरोध का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।साल 1896 में कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया था।इसके बाद स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न सभाओं और आंदोलनों में इसका व्यापक इस्तेमाल हुआ।
भारत के राष्ट्रीय गीत को मिला विशेष सम्मान
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 'वंदे मातरम्' को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष स्थान दिया गया।24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस गीत को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान सम्मान दिया जाएगा।इस प्रकार 'वंदे मातरम्' देश की राष्ट्रीय पहचान और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।आज भी यह गीत विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और शैक्षणिक संस्थानों में गाया जाता है।इसकी ऐतिहासिक भूमिका भारतीय साहित्य, संगीत और स्वतंत्रता आंदोलन की साझा विरासत से जुड़ी हुई है।
राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष आयोजन
भारत सरकार ने 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशव्यापी कार्यक्रमों की शुरुआत की थी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में वर्षभर चलने वाले स्मृति समारोह का उद्घाटन किया था।इन कार्यक्रमों को 7 नवंबर 2026 तक आयोजित करने की योजना बनाई गई है।इस अभियान का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीत के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और इसकी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।इस अवसर पर विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किए गए थे।देश के विभिन्न हिस्सों में सामूहिक गायन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया।
हरिहरन की संगीत यात्रा भी रही शानदार
हरिहरन भारतीय संगीत जगत के प्रमुख पार्श्व गायकों में शामिल हैं।उन्होंने हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम और अन्य भाषाओं में अनेक लोकप्रिय गीत गाए हैं।उन्होंने 1980 के दशक में अपने संगीत करियर की शुरुआत की और अपनी विशिष्ट गायन शैली से पहचान बनाई।फिल्म 'बॉम्बे' का 'तू ही रे', 'रोजा' का 'रोजा जानेमन' और 'खामोशी' का 'बाहों के दरमियां' उनके चर्चित गीतों में शामिल हैं।भारतीय संगीत में योगदान के लिए वर्ष 2004 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।संगीत की विभिन्न शैलियों में अपनी पहचान बनाने वाले हरिहरन ने अब राष्ट्रीय गीत की विशेष प्रस्तुति के माध्यम से एक और सांस्कृतिक पहल से स्वयं को जोड़ा है।
राष्ट्रपति भवन की मुलाकात ने जोड़ी संगीत और विरासत की कड़ी
राष्ट्रपति भवन में हरिहरन और उनके परिवार की चार पीढ़ियों की मुलाकात भारतीय संगीत की निरंतर चलती परंपरा का प्रतीक बनकर सामने आई है।एक ओर 'वंदे मातरम्' का ऐतिहासिक महत्व है, वहीं दूसरी ओर विनाइल रिकॉर्ड के जरिए पारंपरिक संगीत माध्यम को फिर से प्रस्तुत करने की पहल है।इस मुलाकात ने राष्ट्रीय गीत की विरासत, संगीत के प्रति समर्पण और एक परिवार की कई पीढ़ियों के सांस्कृतिक जुड़ाव को एक साथ सामने रखा।हरिहरन के लिए यह अवसर केवल एक प्रतिष्ठित हस्ती से मुलाकात का नहीं, बल्कि अपनी संगीत यात्रा और परिवार की परंपरा को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के सामने सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का भी था।
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