विरोध के आगे झुकना पड़ा? इन मुद्दों पर केंद्र सरकार ने बदली अपनी रणनीति
केंद्र सरकार की बड़ी वापसी
New Delhi: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई बड़े फैसले लिए, जिनमें आर्थिक सुधार, सामाजिक योजनाएं और प्रशासनिक बदलाव शामिल रहे। हालांकि, कुछ ऐसे मुद्दे भी रहे जहां जन विरोध, राजनीतिक दबाव, कानूनी चुनौतियों या व्यापक बहस के बाद सरकार को अपने फैसलों में बदलाव करना पड़ा या कदम वापस लेने पड़े।
इन फैसलों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग नजरिए रहे। जहां सरकार ने इन्हें जनहित और संवाद के आधार पर लिए गए फैसले बताया, वहीं विपक्ष ने इन्हें नीतिगत दबाव और विरोध के परिणाम के रूप में पेश किया।
1. तीन कृषि कानूनों की वापसी
मोदी सरकार के सबसे चर्चित फैसलों में से एक था तीन कृषि कानूनों को लागू करना। सरकार ने इन्हें कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों को अधिक विकल्प देने वाला कदम बताया था।
लेकिन पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसानों ने इन कानूनों का लंबे समय तक विरोध किया। करीब एक साल चले किसान आंदोलन के बाद नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की।
सरकार ने कहा कि व्यापक सहमति बनाने और किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।
2. लेटरल एंट्री भर्ती विज्ञापन पर रोक
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के जरिए लेटरल एंट्री से अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव पर विपक्ष ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने UPSC से इस संबंध में जारी विज्ञापन को रद्द करने का अनुरोध किया। सरकार ने कहा कि सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।
3. अग्निपथ योजना में बदलाव
सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं के एक वर्ग में विरोध देखने को मिला। प्रदर्शन और चिंताओं के बाद सरकार ने योजना में कुछ बदलाव और अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की।
हालांकि योजना को वापस नहीं लिया गया, लेकिन भर्ती प्रक्रिया और पात्रता से जुड़े कुछ नियमों में संशोधन किए गए।
4. प्रसारण विधेयक पर कदम पीछे
डिजिटल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट को लेकर प्रस्तावित प्रसारण विधेयक पर मीडिया संगठनों और विशेषज्ञों ने सवाल उठाए।
इसके बाद सरकार ने मसौदे पर आगे बढ़ने से पहले सुझाव और विचार-विमर्श की प्रक्रिया अपनाई। इसे सरकार द्वारा पुनर्विचार के तौर पर देखा गया।
5. भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल
मोदी सरकार के शुरुआती वर्षों में भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव का प्रस्ताव लाया गया था। सरकार इसे विकास परियोजनाओं को गति देने वाला कदम बता रही थी।
लेकिन किसान संगठनों और विपक्ष के विरोध के कारण इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति नहीं बन सकी और सरकार को इसे आगे बढ़ाने में कठिनाई हुई।
6. परीक्षा और भर्ती व्यवस्था पर सुधार
NEET सहित कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों के बाद सरकार को परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करनी पड़ी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बाद सुधारात्मक कदम उठाए गए।
7. CAA नियमों में देरी
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 में पारित हुआ, लेकिन इसके नियमों को लागू करने में काफी समय लगा। देशभर में हुए विरोध और राजनीतिक विवादों के बीच सरकार ने नियमों को अंतिम रूप देने में लंबी प्रक्रिया अपनाई।
फैसला बदलना या लोकतांत्रिक प्रक्रिया?
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सरकार का नीति में बदलाव करना लोकतंत्र में असामान्य नहीं है। कई बार जनभावना, न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए सरकारें अपने फैसलों की समीक्षा करती हैं।
समर्थक इसे सरकार की संवेदनशीलता बताते हैं, जबकि विपक्ष इसे दबाव में लिया गया फैसला कहता है।