पुलिस को चकमा, अलग-अलग रास्तों से पहुंचे प्रदर्शनकारी

Update: 2026-07-20 15:09 GMT

नई दिल्ली। ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने इस बार अपनी रणनीति से दिल्ली पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। प्रदर्शनकारियों ने एक साथ एक ही रास्ते से आगे बढ़ने के बजाय ‘मल्टी-ग्रुप, मल्टी-रूट’ रणनीति अपनाई। छोटे-छोटे समूहों में बंटकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग रास्तों और मेट्रो स्टेशनों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी संसद क्षेत्र तक पहुंचने की कोशिश करते रहे। उनका एकमात्र लक्ष्य संसद भवन के आसपास पहुंचकर प्रदर्शन करना था।

इस रणनीति के कारण पुलिस की शुरुआती तैयारियां प्रभावित हुईं। दिल्ली पुलिस का पूरा ध्यान मुख्य मार्च और जंतर-मंतर से निकलने वाले जुलूस को रोकने पर केंद्रित था, लेकिन प्रदर्शनकारी एक साथ एक जगह से आगे नहीं बढ़े। अलग-अलग समूहों ने अपनी योजना के अनुसार अलग-अलग रास्ते चुने, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को लगातार अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों ने सेंट्रल दिल्ली पहुंचने के लिए कई मेट्रो स्टेशनों और मार्गों का इस्तेमाल किया। राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, नई दिल्ली, शिवाजी स्टेडियम जैसे प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के रास्ते कई समूह संसद क्षेत्र की ओर बढ़े। पुलिस एक स्थान पर भीड़ को नियंत्रित करने में जुटती, तब तक दूसरे रास्ते से नया समूह आगे बढ़ जाता था।

इस पूरी रणनीति ने सुरक्षा व्यवस्था को कई हिस्सों में बांट दिया। पुलिस को एक साथ कई मोर्चों पर निगरानी करनी पड़ी। जंतर-मंतर से मुख्य मार्च के आगे बढ़ने के साथ ही कनॉट प्लेस, जनपथ, रेल भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन और संसद मार्ग की ओर भी प्रदर्शनकारी पहुंचने लगे। इससे पुलिस के सामने भीड़ को नियंत्रित करने की चुनौती और बढ़ गई।

हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने कई स्तरों पर कार्रवाई की। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए गए। कुछ स्थानों पर मेट्रो ट्रेनों के ठहराव को भी प्रभावित किया गया। संसद क्षेत्र की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर अतिरिक्त बैरिकेड लगाए गए और बड़ी संख्या में पुलिस व अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।

इसके बावजूद कई समूह संसद मार्ग और आसपास के संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने में सफल रहे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगहों पर धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े।

भीड़ को पीछे हटाने के लिए पुलिस ने कई चरणों में कार्रवाई की। कुछ जगहों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और हल्का बल प्रयोग भी किया गया। सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए लगातार अपनी तैनाती बदलती रही।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा असर कनॉट प्लेस, जनपथ, संसद मार्ग और आसपास के वीवीआईपी इलाकों में देखने को मिला। प्रदर्शन के कारण आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कार्यालय जाने वाले लोगों, मरीजों और यात्रियों को कई जगहों पर जाम और रास्ते बंद होने की समस्या का सामना करना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर बैरिकेड और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। सड़क किनारे खड़े कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की जानकारी भी मिली। यातायात व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रही और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए लगातार अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

पूरे घटनाक्रम से साफ हुआ कि प्रदर्शनकारियों की ‘मल्टी-ग्रुप, मल्टी-रूट’ रणनीति ने सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती पेश की। एक ही लक्ष्य के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करने की वजह से पुलिस को अपनी पारंपरिक रणनीति बदलनी पड़ी और पूरे दिन हालात के अनुसार कार्रवाई करनी पड़ी।

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