नई दिल्ली। देश में बिजली उत्पादन को लेकर कोयले के स्टॉक पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के करीब 40 प्रतिशत कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंच गया है। इसका कारण अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव से सामान्य से अधिक गर्मी और बिजली की मांग में अचानक हुई बढ़ोतरी को बताया जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, 19 सितंबर तक देश में ऐसे बिजली संयंत्रों की संख्या बढ़कर 74 हो गई, जहां कोयले का स्टॉक निर्धारित जरूरत के 25 प्रतिशत से भी कम रह गया है या जहां उपलब्ध कोयले से तीन दिन से कम समय तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है। पिछले सप्ताह ऐसे संयंत्रों की संख्या करीब 60 थी।
बिजली क्षेत्र के लिए कोयले की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि भारत की बिजली व्यवस्था का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों पर निर्भर है। ऐसे में स्टॉक में कमी आने से उत्पादन व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
बढ़ती गर्मी से बिजली मांग में उछाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहा है। अल-नीनो प्रभाव के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिला है, जिससे गर्मी बढ़ी और लोगों ने कूलिंग उपकरणों का अधिक इस्तेमाल किया।
गर्मी बढ़ने के साथ ही घरों, व्यावसायिक संस्थानों और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की खपत बढ़ गई। अचानक बढ़ी मांग के कारण बिजली संयंत्रों में कोयले की खपत भी तेज हो गई।
कई संयंत्रों में घटा कोयला भंडार
कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में सामान्य संचालन के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार बनाए रखना जरूरी होता है। लेकिन बढ़ी हुई मांग और खपत के कारण कई संयंत्रों में कोयले का स्टॉक कम हो गया है।
आंकड़ों में बताया गया है कि जिन संयंत्रों में तीन दिन से कम समय का कोयला उपलब्ध है, उनकी संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। यह स्थिति बिजली उत्पादन की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
सरकार और एजेंसियों की निगरानी बढ़ी
बिजली और कोयला मंत्रालय से जुड़े विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कोयले की आपूर्ति, परिवहन और बिजली उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए निगरानी की जा रही है।
सरकार का प्रयास है कि बिजली संयंत्रों को जरूरत के अनुसार कोयले की आपूर्ति मिलती रहे, ताकि बिजली उत्पादन प्रभावित न हो।
कोयला आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव
देश में बिजली की मांग बढ़ने के साथ कोयले की खपत भी बढ़ी है। वहीं, कोयले की आपूर्ति में खनन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कई चरण शामिल होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मांग में अचानक वृद्धि होने पर आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव आ सकता है। ऐसे समय में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना बिजली क्षेत्र के लिए चुनौती बन जाता है।
बिजली क्षेत्र के लिए अहम समय
भारत में मानसून के बाद के महीनों में बिजली की मांग कई बार बढ़ जाती है। तापमान में वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण बिजली की जरूरत बढ़ती है।
कोयला आधारित बिजली संयंत्र देश की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए इनमें ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना बिजली आपूर्ति की स्थिरता के लिए जरूरी है।
आगे की स्थिति पर नजर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कम कोयला भंडार वाले संयंत्रों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, बिजली उत्पादन और कोयला आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बिजली मांग में अचानक बढ़ोतरी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ईंधन भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत होगी।
फिलहाल सरकार की प्राथमिकता बिजली संयंत्रों तक पर्याप्त कोयला पहुंचाना और बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और बिजली मांग के आधार पर कोयला स्टॉक की स्थिति में बदलाव देखा जा सकता है।