सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी कपिल सिब्बल से कही ये बात
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के बीच हुई एक टिप्पणी चर्चा में आ गई। मामला पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ी याचिका का था, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है।सुनवाई के दौरान जब कपिल सिब्बल ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग करते हुए अपनी दलील रखनी शुरू की तो CJI सूर्यकांत ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा, **"ज्यादा मत बोलिए और इस मामले में अभी बहस न करें। वरना, दूसरी तरफ से भी बहस होगी। इसे पहले लिस्ट होने दीजिए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच विवाद से जुड़ा है। ममता बनर्जी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था।कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि चुनाव प्रक्रिया के बीच चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति बदलना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी से जुड़ी कार्यवाही पहले शुरू हुई थी और जवाब भी दाखिल किया गया था, लेकिन चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव चिह्न को लेकर फैसला लिया गया।
सिब्बल ने क्यों मांगी तुरंत सुनवाई?
सिब्बल का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव चिह्न पर रोक लगाने से पार्टी और उसके उम्मीदवारों पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई और आयोग के आदेश पर रोक लगाने की मांग की।उन्होंने सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में जल्द हस्तक्षेप की जरूरत है। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने उन्हें विस्तृत बहस से बचने और मामले को पहले सूचीबद्ध होने देने की बात कही।
CJI सूर्यकांत की टिप्पणी का मतलब क्या था?
सुप्रीम कोर्ट में जब किसी मामले की प्रारंभिक सुनवाई होती है, तो अदालत कई बार पक्षकारों से केवल जरूरी तथ्य रखने को कहती है। इस दौरान विस्तृत बहस से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि दूसरे पक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिल सके।CJI की टिप्पणी भी इसी संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि अगर अभी विस्तार से बहस होगी तो दूसरे पक्ष को भी जवाब देने का मौका देना पड़ेगा। इसलिए पहले मामले को सूचीबद्ध होने देने की बात कही गई।
ममता बनर्जी की याचिका में क्या मांग है?
ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका में निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका में आयोग और संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद के समाधान तक अंतरिम राहत की मांग की गई है।
चुनाव चिह्न विवाद क्यों महत्वपूर्ण होता है?
भारत में राजनीतिक दलों के लिए चुनाव चिह्न की पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। चुनाव के दौरान मतदाताओं के लिए यह पार्टी की पहचान का प्रमुख माध्यम होता है। इसलिए चुनाव चिह्न को लेकर किसी भी विवाद का असर राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान पर पड़ सकता है।निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवादों पर अपने नियमों के तहत निर्णय लेता है। ऐसे फैसलों को चुनौती देने के लिए संबंधित पक्ष अदालत का रुख कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या होगा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। आगे की सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकती है और इसके बाद मामले पर कोई अंतरिम या अंतिम आदेश दे सकती है।इस पूरे मामले में CJI सूर्यकांत की टिप्पणी इसलिए चर्चा में आई क्योंकि यह सुनवाई के दौरान अदालत की कार्यप्रणाली से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा थी। अदालत ने फिलहाल केवल मामले को उचित तरीके से सुनवाई के लिए आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।