नई दिल्ली। दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) आवासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने अपनी कवायद तेज कर दी है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को PG मालिकों, संचालकों और प्रबंधकों के साथ फॉलो-अप बैठक की। बैठक में छात्र सुरक्षा, किराया, बुनियादी सुविधाओं और PG संचालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की गई। सरकार आने वाले हफ्तों में PG के लिए अंतिम नियामक ढांचा और दिशानिर्देश पेश करने की तैयारी कर रही है।यह बैठक शिक्षा मंत्री की PG में रहने वाले छात्रों के साथ हुई बातचीत के बाद आयोजित की गई। इससे पहले छात्रों ने सुरक्षा, ज्यादा किराया, बिजली शुल्क और अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए थे। अब सरकार ने PG मालिकों और संचालकों का पक्ष भी जानना शुरू किया है, ताकि प्रस्तावित व्यवस्था में छात्रों और संचालकों दोनों से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को शामिल किया जा सके।
छात्रों की सुरक्षा पर विशेष जोर
बैठक का प्रमुख मुद्दा PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा रहा। दिल्ली में हर साल देश के विभिन्न हिस्सों से छह लाख से अधिक छात्र आते हैं और इनमें से बड़ी संख्या PG आवासों में रहती है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन छात्रों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद आवास सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।बैठक के दौरान PG मालिकों और संचालकों से उनके काम करने के तरीके और सामने आने वाली समस्याओं की जानकारी ली गई। इसके साथ ही छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
छात्रों से पहले की गई थी बातचीत
शिक्षा मंत्री आशीष सूद इससे पहले अलग-अलग विश्वविद्यालय क्षेत्रों में PG में रहने वाले छात्रों से बातचीत कर चुके हैं। इस संवाद के दौरान छात्रों ने PG व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याएं सामने रखी थीं। इनमें मनमाना बिजली शुल्क, अधिक किराया, सुरक्षा की कमी और मकान मालिकों के सत्यापन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।छात्रों की समस्याएं सुनने के बाद सरकार ने PG व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई। अब PG मालिकों और संचालकों से बातचीत इसी प्रक्रिया का अगला चरण है।
बेहतर तालमेल पर जोर
शिक्षा मंत्री ने छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए PG मालिकों, संचालकों और संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। सरकार की कोशिश है कि PG में रहने वाले छात्रों को सुरक्षित माहौल के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध हों।PG व्यवस्था में कई पक्ष शामिल होते हैं। कहीं भवन का मालिक अलग होता है और संचालन किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में होता है। इसी वजह से जिम्मेदारियों और छात्रों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकार ने पहले ही PG संचालकों के पंजीकरण और जानकारी के लिए एक साझा वेब पोर्टल की योजना पर काम शुरू किया है।
नए नियमों की तैयारी
दिल्ली सरकार PG आवासों के लिए व्यापक नियामक व्यवस्था तैयार कर रही है। सितंबर में छात्र आवास और सुरक्षा से जुड़ी 20 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक भी आयोजित की गई थी। इसमें मानकीकृत किराया समझौते, PG पंजीकरण, भवन एवं अग्नि सुरक्षा ऑडिट और किराये से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।प्रस्तावित व्यवस्था में PG प्रतिष्ठानों के लाइसेंस, स्थानीय पुलिस से मंजूरी तथा स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी संबंधी नियमों को भी शामिल करने पर काम चल रहा है। मसौदा प्रावधानों में PG को सार्वजनिक पोर्टल पर सूचीबद्ध करने जैसे उपाय भी सामने आए हैं।
बुनियादी सुविधाओं पर भी चर्चा
छात्रों की सुरक्षा के अलावा PG में रहने की बुनियादी स्थितियों पर भी सरकार का ध्यान है। बैठक में सुविधाओं, किराये और संचालन से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों पर PG मालिकों का पक्ष सुना गया। सरकार चाहती है कि नियम बनाते समय केवल छात्रों की शिकायतों ही नहीं, बल्कि PG संचालकों के सामने आने वाली वास्तविक समस्याओं को भी समझा जाए।इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसा नियामक ढांचा तैयार करना है जिसमें छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता मिले, साथ ही PG संचालकों के लिए नियम और जिम्मेदारियां स्पष्ट रहें।
आने वाले हफ्तों में अंतिम रूपरेखा
शिक्षा मंत्री के मुताबिक PG आवासों से संबंधित अंतिम नियामक ढांचा और दिशानिर्देश आने वाले हफ्तों में पेश किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों के सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा।फिलहाल PG मालिकों के साथ हुई फॉलो-अप बैठक को दिल्ली में छात्र आवास व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। छात्रों से सीधे संवाद के बाद अब संचालकों की राय लेकर सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर रही है, जिसमें सुरक्षा, सुविधाओं और संचालन से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट हों।