Delhi दिल्ली सरकारी सर्कुलर के अनुसार, दिल्ली पुलिस के प्रस्तावित 'दिल्ली डिजिटल क्राइम एंड साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर' (D4C) का ढांचा कई स्तरों वाला होगा। इसमें साइबर क्राइम की जांच, फाइनेंशियल फ्रॉड को रोकने, डिजिटल फोरेंसिक, साइबर खतरों की जानकारी (इंटेलिजेंस), साइबर सिक्योरिटी और लोगों को जागरूक करने के लिए खास यूनिट्स होंगी। इस सेंटर में एक एडमिनिस्ट्रेटिव विंग, एक साइबर इन्वेस्टिगेशन विंग और एक ऑपरेशन्स विंग शामिल होंगे। एडमिनिस्ट्रेटिव विंग दिल्ली पुलिस के जिलों, क्राइम ब्रांच, दूसरे राज्यों, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), केंद्रीय एजेंसियों, बैंकों, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ साइबर ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएगा। यह एडमिनिस्ट्रेशन, फाइनेंस, लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग और लोगों को जागरूक करने का काम भी संभालेगा।
एक खास 'कैपेसिटी बिल्डिंग यूनिट' दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों, सरकारी वकीलों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को साइबर जांच, डिजिटल फोरेंसिक और साइबर कानून की ट्रेनिंग देगी। यह मैलवेयर एनालिसिस, ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT), साइबर खतरों की जानकारी और घटना के बाद की कार्रवाई (इंसिडेंट रिस्पॉन्स) पर कोर्स चलाएगी। यह यूनिट जागरूकता गतिविधियों के लिए युवाओं और सीनियर सिटिजन्स में से 'साइबर वॉरियर्स' भी तैयार करेगी।
साइबर इन्वेस्टिगेशन विंग, जिसके प्रमुख डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस होंगे, बड़े साइबर क्राइम मामलों की जांच करेगा। बड़े मूल्य वाले, कई पीड़ितों वाले और जटिल साइबर क्राइम मामलों को दर्ज करने और उनकी जांच के लिए पूरे दिल्ली में अधिकार क्षेत्र वाला एक D4C पुलिस स्टेशन प्रस्तावित है। इस विंग में एक 'स्टेट डिजिटल इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सेंटर' भी होगा जो मोबाइल, मेमोरी, क्लाउड और नेटवर्क फोरेंसिक, CCTV जांच और क्रिप्टोकरेंसी की जांच के लिए तैयार होगा। ऑपरेशन्स विंग D4C के इंटेलिजेंस, एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव-पुलिसिंग विंग के तौर पर काम करेगा। इसमें 1930 साइबर हेल्पलाइन, फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर, साइबर थ्रेट्स डिवीजन और साइबर सिक्योरिटी डिवीजन शामिल होंगे।
1930 हेल्पलाइन साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड की रिपोर्ट करने के लिए मुख्य संपर्क बिंदु बनी रहेगी और योग्य मामलों में ई-ज़ीरो FIR के ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन में मदद कर सकती है। फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर धोखाधड़ी वाले ट्रांज़ैक्शन को रोकने और वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए बैंकों के साथ मिलकर रियल-टाइम में काम करेगा। साइबर थ्रेट्स डिवीजन उभरते साइबर क्राइम ट्रेंड्स, वित्तीय ट्रांज़ैक्शन और संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क का विश्लेषण करेगा। इसमें रिसर्च, डेटा एनालिटिक्स, साइबर खतरों की निगरानी और VPN, एनोनिमाइज़ेशन और स्पूफ्ड कम्युनिकेशन से जुड़े फर्जी बम ईमेल की जांच के लिए खास यूनिट्स भी होंगी। साइबर सिक्योरिटी डिवीजन नेटवर्क और सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर, साइबर कमांडो, प्रिवेंटिव सिक्योरिटी टीमों और इंसिडेंट रिस्पॉन्स यूनिट्स के ज़रिए दिल्ली पुलिस और सरकारी डिजिटल सिस्टम पर खतरों की निगरानी करेगा।
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