नई दिल्ली: कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) को कमजोर करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि यह योजना देश के गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा की तरह है, लेकिन सरकार इसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां गरीबों की आजीविका को प्रभावित कर रही हैं और इसका फायदा कुछ चुनिंदा बड़े उद्योगपतियों को पहुंचाया जा रहा है।

जयराम रमेश ने उठाए सवाल



जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि MGNREGA ग्रामीण भारत के करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस योजना को कमजोर कर रही है और गरीब परिवारों के रोजगार के अधिकार को प्रभावित कर रही है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सरकार की असली नीति गरीबों से उनकी रोजी-रोटी छीनकर बड़े कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने की है।

बलिया की रिपोर्ट का दिया हवाला

जयराम रमेश ने जिस मीडिया रिपोर्ट को साझा किया, उसमें उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के जॉब कार्ड धारकों को लेकर दावा किया गया था।

रिपोर्ट में बताया गया था कि कुछ ग्रामीणों में रोजगार और आजीविका मिशन से जुड़ी नई योजनाओं को लेकर असंतोष है।

कांग्रेस ने इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की योजनाओं और ग्रामीण रोजगार व्यवस्था पर सवाल उठाए।

MGNREGA को बताया गरीबों की ताकत

कांग्रेस ने कहा कि MGNREGA केवल रोजगार देने वाली योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार भी है।

पार्टी का कहना है कि खेती के कमजोर समय, बेरोजगारी या आर्थिक संकट के दौरान यह योजना ग्रामीण लोगों को सहारा देती है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बजट और नीतिगत फैसलों के जरिए इस योजना को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

सरकार पर लगाए कॉरपोरेट हितों के आरोप

जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियां आम लोगों की बजाय बड़े उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि गरीबों की मदद करने वाली योजनाओं को कमजोर करना सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है।

हालांकि, केंद्र सरकार पहले भी इन आरोपों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि ग्रामीण विकास योजनाओं को मजबूत किया जा रहा है।

रोजगार योजनाओं को लेकर जारी है राजनीतिक बहस

MGNREGA को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस चलती रही है।

जहां विपक्ष इसे ग्रामीण रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बताता है, वहीं सरकार का कहना है कि उसने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया है।

सरकार की ओर से कई बार कहा गया है कि MGNREGA के तहत काम करने वाले लोगों को समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीण रोजगार बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

देश में ग्रामीण रोजगार हमेशा से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। चुनावों के दौरान भी रोजगार, मजदूरी और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाते हैं।

कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर आरोप लगाती रही है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

वहीं, भाजपा सरकार अपनी योजनाओं और विकास कार्यों को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए फायदेमंद बताती है।

आगे भी जारी रह सकता है सियासी टकराव

MGNREGA को लेकर कांग्रेस के ताजा हमले के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

कांग्रेस जहां इसे गरीबों के अधिकार और आजीविका से जोड़ रही है, वहीं सरकार अपनी नीतियों का बचाव कर सकती है।

फिलहाल MGNREGA और ग्रामीण रोजगार योजनाएं एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर बहस तेज होने के संकेत हैं।

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