ग्रीन पटाखों पर केंद्र का बड़ा रुख नए सिरे से टेस्टिंग की मांग
ग्रीन पटाखों की फिर होगी जांच केंद्र ने SC में रखा पक्ष
नई दिल्ली: ग्रीन पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार की दो संस्थाओं की अलग-अलग राय सामने आने के बाद मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि वह नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों का नए सिरे से परीक्षण कराना चाहती है, ताकि यह वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट हो सके कि इनमें बेरियम के इस्तेमाल का पर्यावरण और प्रदूषण पर कितना प्रभाव पड़ता है।
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद सरकार ने नए परीक्षण कराने का निर्णय लिया है। ये परीक्षण दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई में कराए जाने की योजना है।
NEERI और CPCB की राय अलग
विवाद की मुख्य वजह CSIR के नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी NEERI और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB की अलग-अलग राय है।CSIR-NEERI ने ग्रीन पटाखों के नए फॉर्मूलेशन का परीक्षण करने के बाद इन्हें व्यावसायिक उत्पादन के लिए उपयुक्त बताया था। वहीं CPCB ने इन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। CPCB का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2018 के आदेश में पटाखों में बेरियम साल्ट के इस्तेमाल पर स्पष्ट रोक लगाई थी। ऐसे में कम मात्रा में ही सही, बेरियम वाले किसी फॉर्मूलेशन को मंजूरी देना उस आदेश के अनुरूप नहीं होगा।
NEERI ने बताया प्रदूषण में कमी
केंद्र सरकार ने CSIR-NEERI को निर्माताओं के साथ मिलकर कम प्रदूषण फैलाने वाले ग्रीन पटाखे विकसित करने का काम दिया था। तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड अमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने ऐसे नए फॉर्मूलेशन तैयार किए, जिनमें दूसरे ऑक्सीडाइजर के साथ बेरियम साल्ट या नाइट्रेट की मात्रा कम रखी गई।
NEERI की रिपोर्ट के मुताबिक इन नए फॉर्मूलेशन से PM10 और PM2.5 उत्सर्जन में करीब 45 से 60 प्रतिशत तक कमी देखी गई। इसके आधार पर संस्थान ने फूलझड़ी, अनार, चकरी, पेंसिल और ट्विंकलिंग स्टार जैसे रोशनी वाले पटाखों के नए फॉर्मूलेशन को व्यावसायिक उत्पादन के लिए विचार योग्य बताया।
लड़ी वाले पटाखों पर भी विवाद
NEERI ने 'जॉइंड क्रैकर्स' यानी लड़ी वाले पटाखों के निर्माण को लेकर भी सकारात्मक राय दी। रिपोर्ट में कहा गया कि इनसे पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन में लगभग 30 प्रतिशत और ठोस कचरे में करीब 32 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
लेकिन यह मुद्दा भी विवाद का कारण बन गया क्योंकि लड़ी वाले पटाखों पर पहले अदालत की ओर से रोक लगाई जा चुकी है।
CPCB ने उठाए गंभीर सवाल
CPCB ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट बेरियम साल्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा चुका है तो नए ग्रीन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी कहा कि नए पटाखों से PM10 और PM2.5 में कमी के दावे की तुलना बेहतर लो-एमिशन पटाखों और पूरी तरह बेरियम रहित ग्रीन पटाखों के साथ पर्याप्त रूप से नहीं की गई है। CPCB के मुताबिक ऐसी तुलनात्मक जांच के बिना प्रदूषण कम होने के दावे को अंतिम नहीं माना जा सकता।
केंद्र ने कहा दोबारा होगी जांच
दो केंद्रीय संस्थाओं की अलग-अलग राय के बीच केंद्र सरकार ने अब नए सिरे से वैज्ञानिक परीक्षण का रास्ता चुना है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि सरकार विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई में परीक्षण कराना चाहती है। अलग-अलग भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों वाले शहरों में परीक्षण से ग्रीन पटाखों के वास्तविक प्रभाव का बेहतर आकलन होने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी विशेषज्ञों की राय
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में विशेषज्ञों की राय लेने पर जोर दिया है। अदालत ने कहा कि यह वैज्ञानिक और तकनीकी विषय है और विशेषज्ञों के सुझाव महत्वपूर्ण होंगे। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से भी बेरियम के इस्तेमाल का विरोध किया गया। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले कई आदेशों में इसके इस्तेमाल पर रोक लगा चुका है, इसलिए इसे नए फॉर्मूलेशन के नाम पर वापस लाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
दिवाली से पहले अहम हुआ मामला
ग्रीन पटाखों को लेकर यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले त्योहारी सीजन से पहले पटाखा निर्माता उत्पादन और बिक्री से जुड़े नियमों पर स्पष्टता चाहते हैं। एक तरफ पटाखा उद्योग से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली-NCR सहित कई शहरों में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनौती पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने की है।
फिलहाल केंद्र ने स्पष्ट किया है कि नए ग्रीन पटाखों को लेकर अंतिम राय से पहले उनका नए सिरे से परीक्षण किया जाएगा। इन परीक्षणों के नतीजे इस बात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि भविष्य में बेरियम की कम मात्रा वाले ग्रीन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन को अनुमति मिलेगी या प्रतिबंध जारी रहेगा।