दिवाली पर बीजेपी का बड़ा आयोजन, 50 देशों के 90 से ज्यादा राजनयिकों को न्योता
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक और राजनीतिक संपर्क को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिवाली मिलन समारोह आयोजित करने की तैयारी में हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में करीब 50 देशों के 90 से अधिक राजनयिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने की योजना है। इस आयोजन के माध्यम से विदेशी राजनयिकों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, त्योहारों और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक संवाद और आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी मिल सकता है।
दिवाली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे प्रकाश, खुशहाली, सकारात्मकता और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर विदेशी राजनयिकों को एक मंच पर लाने की पहल को सांस्कृतिक संपर्क के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से भारत की विविधता, परंपराओं और अतिथि सत्कार की भावना को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है।
बीजेपी की ओर से विदेशी राजनयिकों के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए पहले भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। पार्टी की 'भाजपा को जानो' पहल के तहत विभिन्न देशों के मिशन प्रमुखों और वरिष्ठ राजनयिकों के साथ बैठकें आयोजित की गई हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विदेशी प्रतिनिधियों को भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, राजनीतिक विचारधारा, कार्यप्रणाली और जनसंपर्क गतिविधियों की जानकारी देना रहा है।
इससे पहले 24 सितंबर 2026 को नितिन नवीन ने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आठ देशों के मिशन प्रमुखों और वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। इनमें अर्मेनिया, मिस्र, वियतनाम, भूटान, सूरीनाम, फिलीपींस, अर्जेंटीना और ताजिकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक के दौरान भाजपा अध्यक्ष ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, देशभर में फैले कार्यकर्ता नेटवर्क और जनसंपर्क अभियानों के बारे में जानकारी साझा की थी।
नितिन नवीन ने उस बातचीत के दौरान भाजपा के सेवा संकल्प अभियान का भी उल्लेख किया था। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया था। इसके तहत जनसेवा, जनभागीदारी, अंत्योदय और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्रमुखता दी गई थी। अभियान में रक्तदान शिविरों, स्वास्थ्य शिविरों तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों को शामिल किया गया था।
राजनीतिक दलों और विदेशी राजनयिकों के बीच इस तरह के संवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं को समझने में सहायक हो सकते हैं। सामान्य तौर पर देशों के बीच औपचारिक संबंध विदेश मंत्रालयों, दूतावासों और सरकारी प्रतिनिधियों के माध्यम से संचालित होते हैं। हालांकि, राजनीतिक दलों, सांस्कृतिक संस्थाओं, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों के बीच संपर्क भी अंतरराष्ट्रीय संवाद को व्यापक आधार प्रदान कर सकता है।
दिवाली मिलन जैसे आयोजन इसी अनौपचारिक संपर्क का एक माध्यम बन सकते हैं। ऐसे अवसरों पर अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों को भारतीय परंपराओं को करीब से देखने और समझने का मौका मिलता है। इसके साथ ही त्योहारों के सामाजिक महत्व, पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक विविधता पर विचारों का आदान-प्रदान भी संभव होता है।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन इससे पहले भी विदेशी राजनयिकों के साथ सांस्कृतिक संपर्क की पहल कर चुके हैं। जून 2026 में उन्होंने दिल्ली में तैनात 82 देशों के राजनयिकों को भारतीय आम उपहार स्वरूप भेजे थे। इनमें गिर केसर, बंगनापल्ले, दशहरी और बनारसी लंगड़ा जैसी प्रसिद्ध किस्में शामिल थीं। इस पहल का उद्देश्य भारत की बागवानी विरासत, सांस्कृतिक पहचान और आतिथ्य परंपरा को सामने लाना बताया गया था।
राजनयिक संपर्क की इन पहलों को भारतीय जनता पार्टी के अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रमों की निरंतरता के रूप में भी देखा जा सकता है। पार्टी ने पिछले कुछ समय में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को अपने संगठन और कार्यप्रणाली की जानकारी देने के लिए संवाद आयोजित किए हैं। इन कार्यक्रमों के दौरान भारत की विकास संबंधी प्राथमिकताओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और सरकार की नीतियों पर भी चर्चा हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक साझेदारी को प्रमुखता देती रही है। योग, भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक उत्सवों और प्रवासी भारतीय समुदाय से जुड़े कार्यक्रमों ने भी विभिन्न देशों के बीच सामाजिक संपर्क को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। दिवाली मिलन जैसे आयोजन इसी व्यापक सांस्कृतिक संवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सांस्कृतिक संपर्क औपचारिक कूटनीतिक संबंधों का विकल्प नहीं होता, लेकिन यह विभिन्न समाजों के बीच आपसी समझ विकसित करने में योगदान दे सकता है। त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी से राजनयिकों को मेजबान देश की सामाजिक परंपराओं के बारे में जानकारी मिलती है।
प्रस्तावित दिवाली मिलन समारोह में यदि 50 देशों के 90 से अधिक राजनयिक प्रतिनिधियों की भागीदारी होती है, तो यह भाजपा के विदेशी प्रतिनिधियों के साथ संपर्क कार्यक्रमों में एक उल्लेखनीय आयोजन हो सकता है। हालांकि, आमंत्रित देशों की अंतिम सूची, कार्यक्रम का स्थान, तारीख और अतिथियों की उपस्थिति संबंधी विवरण की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है।
नितिन नवीन के नेतृत्व में प्रस्तावित इस कार्यक्रम को भारतीय संस्कृति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ संवाद बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। आयोजन का वास्तविक स्वरूप और इससे जुड़ी गतिविधियां विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्पष्ट होंगी।