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वायुसेना प्रमुख एपी सिंह की विदाई, 31 अक्टूबर को मिलेगा अंतिम गार्ड ऑफ ऑनर

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को अपने पद से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। लगभग चार दशकों के सैन्य करियर के बाद वे भारतीय वायुसेना को अलविदा कहेंगे। उनके सम्मान में अब तक तीन आधिकारिक विदाई कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक विदाई कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आयोजित किया गया था। वहीं, शनिवार को कार्यकाल के अंतिम दिन उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई दिए जाने का कार्यक्रम है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे। केंद्र सरकार ने 6 अक्टूबर को उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की थी।
वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी विदेश यात्रा पर रवाना होने से पहले 26 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह को औपचारिक विदाई दी थी। इस अवसर पर उनके लंबे सैन्य करियर और भारतीय वायुसेना में योगदान को याद किया गया।
इसके बाद 28 अक्टूबर को वायुसेना मुख्यालय की ओर से दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित वायुसेना सभागार में विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में वायुसेना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही।
इस तरह कार्यकाल के अंतिम सप्ताह में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के सम्मान में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों का उद्देश्य उनके लंबे सेवाकाल और वायुसेना नेतृत्व में निभाई गई भूमिका को सम्मान देना रहा।
शनिवार, 31 अक्टूबर को उनके कार्यकाल का अंतिम दिन होगा। इस अवसर पर औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें अंतिम सैन्य विदाई दिए जाने की जानकारी है। सैन्य परंपरा के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के अवसर पर इस प्रकार के औपचारिक सम्मान का विशेष महत्व होता है।
गार्ड ऑफ ऑनर सैन्य सेवा, अनुशासन और नेतृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रतीक है। इसके माध्यम से संबंधित अधिकारी के योगदान को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाता है।
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने 30 सितंबर 2024 को भारतीय वायुसेना के प्रमुख का पदभार संभाला था। इससे पहले वे वायुसेना के उप प्रमुख के रूप में सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी का स्थान लिया था।
अमर प्रीत सिंह का जन्म 27 अक्टूबर 1964 को हुआ था। वे दिसंबर 1984 में भारतीय वायुसेना की लड़ाकू पायलट शाखा में शामिल हुए थे। अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने विभिन्न परिचालन, प्रशासनिक और प्रशिक्षण संबंधी जिम्मेदारियां निभाईं।
वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। इसके अलावा वे एक योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं।
उनके पास विभिन्न प्रकार के विमानों को उड़ाने का पांच हजार घंटे से अधिक का अनुभव है। उन्होंने लड़ाकू विमानों के साथ अन्य श्रेणियों के विमानों का भी संचालन किया है।
अपने सैन्य करियर के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एक लड़ाकू स्क्वाड्रन और अग्रिम मोर्चे पर स्थित वायुसेना अड्डे की कमान संभाली। उन्होंने रूस के मॉस्को में मिग-29 अपग्रेड परियोजना प्रबंधन टीम का नेतृत्व भी किया।
इसके अतिरिक्त वे राष्ट्रीय उड़ान परीक्षण केंद्र में परियोजना निदेशक के रूप में कार्यरत रहे। इस दौरान उन्हें स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के उड़ान परीक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
वे दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर और पूर्वी वायु कमान में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। वायुसेना उप प्रमुख बनने से पहले उन्होंने मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवाएं दी थीं।
भारतीय वायुसेना में उनके अनुभव का दायरा लड़ाकू विमान संचालन से लेकर तकनीकी परीक्षण और वरिष्ठ नेतृत्व तक फैला रहा है।
सेवानिवृत्ति से पहले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने उड़ान करियर से जुड़ा एक विशेष अनुभव भी दोहराया। उन्होंने 20 अक्टूबर को हैदराबाद के पास डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी में किरण प्रशिक्षण विमान से अंतिम प्रशिक्षण उड़ान भरी।
इस उड़ान को उनके सैन्य जीवन का भावनात्मक क्षण माना गया, क्योंकि उन्होंने अपने शुरुआती उड़ान प्रशिक्षण के दौरान भी इसी प्रकार के विमान का इस्तेमाल किया था।
विशेष बात यह रही कि अंतिम प्रशिक्षण उड़ान में उनके साथ उनके शुरुआती फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) भी मौजूद थे।
लगभग चार दशक पहले जिन प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में उन्होंने उड़ान की शुरुआत की थी, उन्हीं के साथ अंतिम प्रशिक्षण उड़ान भरना उनके लिए यादगार अनुभव रहा।
विमान के उतरने के बाद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को वाटर कैनन सलामी दी गई। इस दौरान वायुसेना अकादमी में उपस्थित अधिकारियों और कर्मियों ने उनका सम्मान किया।
इससे पहले 12 अक्टूबर को उन्होंने जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में अपनी अंतिम लड़ाकू उड़ान भी भरी थी।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का कार्यकाल भारतीय वायुसेना के लिए कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों वाला रहा। इस दौरान वायुसेना ने आधुनिक युद्धक क्षमताओं, स्वदेशी रक्षा तकनीक और परिचालन तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया।
अक्टूबर 2026 में वायुसेना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि भारतीय वायुसेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सतर्क और तैयार है।
उन्होंने आधुनिक संघर्षों में वायु शक्ति की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया था। साथ ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना की परिचालन क्षमता और त्वरित कार्रवाई को भी रेखांकित किया था।
उन्होंने कहा था कि भारतीय वायुसेना का नेतृत्व करना उनके लिए गर्व का विषय रहा है।
अब एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की सेवानिवृत्ति के साथ भारतीय वायुसेना में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को नया वायुसेना प्रमुख नियुक्त किया है।
आशुतोष दीक्षित वर्तमान में वायुसेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। वे 31 अक्टूबर की दोपहर से एयर चीफ मार्शल के पद पर पदोन्नत होकर भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे।
आशुतोष दीक्षित का जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू पायलट शाखा में कमीशन मिला था।
वे एक अनुभवी लड़ाकू पायलट, एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है।
उन्होंने मिराज-2000, मिग, जगुआर, तेजस और अन्य प्रकार के विमानों को उड़ाया है। अपने सेवाकाल में वे ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर सहित महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों से भी जुड़े रहे हैं।
इससे पहले वे मध्य वायु कमान के प्रमुख और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे वरिष्ठ पदों पर सेवाएं दे चुके हैं।
नए वायुसेना प्रमुख के सामने आधुनिक लड़ाकू विमानों की उपलब्धता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, वायु रक्षा प्रणाली और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
विशेष रूप से स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान कार्यक्रम और अन्य आधुनिक रक्षा परियोजनाओं की प्रगति पर वायुसेना नेतृत्व की नजर रहेगी।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने लंबे सैन्य करियर में परिचालन अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशासनिक नेतृत्व के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। अब वे लगभग 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
फिलहाल उनके सम्मान में आयोजित विदाई कार्यक्रमों के बाद शनिवार को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उनके कार्यकाल का समापन होगा। इसी दिन भारतीय वायुसेना को नया प्रमुख मिलेगा और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी।





