नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वाहन चालकों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। रविवार, 1 नवंबर 2026 से प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नए नियम लागू किए जाने की खबर है। इन नियमों के तहत बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल यानी PUC प्रमाणपत्र वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल और सीएनजी देने से इनकार किया जा सकता है। इसके अलावा दिल्ली के बाहर पंजीकृत कुछ पुराने उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने की बात सामने आई है। सरकार का उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करना और सर्दियों के दौरान राजधानी की हवा को बेहतर बनाना है।
दिल्ली में हर साल अक्टूबर से जनवरी के बीच वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है। इस दौरान मौसम में बदलाव, हवा की धीमी गति, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने जैसी गतिविधियां प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देती हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली सरकार की शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू की गई है। राजधानी के बाहर पंजीकृत ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा, जो भारत स्टेज-6 यानी BS-VI उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते हैं। यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों, सीएनजी वाहनों और निर्धारित आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है।
नए नियमों का सबसे ज्यादा असर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और
फरीदाबाद
से रोजाना दिल्ली आने वाले वाहन चालकों पर पड़ सकता है। इन शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन पंजीकृत हैं, जो BS-III और BS-IV मानकों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे वाहनों के मालिकों को अब दिल्ली आने के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था अपनानी पड़ सकती है।
दिल्ली सरकार ने 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नियम को भी सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह नियम वाहन के उत्सर्जन मानक से अलग है। यानी BS-VI वाहन होने के बावजूद अगर उसका पीयूसी प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है, तो चालक को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली के लगभग 500 ईंधन स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करके उनके प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता की जांच करने में मदद करेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ ई-चालान की कार्रवाई भी की जा सकती है।
दिल्ली के प्रवेश मार्गों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की टीमें प्रमुख सीमावर्ती इलाकों में वाहनों की जांच करेंगी। इसके लिए कैमरों और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की मदद ली जाएगी। जिन वाहनों को प्रवेश की अनुमति नहीं है, उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार रोका जाएगा।
सरकार ने अंतरराज्यीय बसों के लिए भी नए मानक निर्धारित किए हैं। दिल्ली में प्रवेश करने वाली निर्धारित श्रेणियों की डीजल बसों को BS-VI उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा। सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों को अनुमति रहेगी। दिल्ली में पंजीकृत बसों के लिए संबंधित आदेश में अलग छूट का प्रावधान है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल वाहनों पर ही सख्ती नहीं की गई है। दिल्ली में अधिकृत सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क भी दोगुना करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। हालांकि, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित पार्किंग स्थलों को बढ़ी हुई दरों से छूट दी गई है।
इसके अलावा सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है। आवश्यक सेवाओं को इससे छूट रहेगी। यातायात का दबाव कम करने के लिए कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है। दिल्ली नगर निगम के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे।
निर्माण कार्यों से होने वाले धूल प्रदूषण को रोकने के लिए भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। धूल पैदा करने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक रहेगी। हालांकि, निर्धारित शर्तों के तहत आवश्यक सार्वजनिक परियोजनाओं और कुछ ऐसे आंतरिक कार्यों को अनुमति दी जा सकती है, जिनसे धूल प्रदूषण नहीं होता। बड़े निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपकरणों का इस्तेमाल भी आवश्यक होगा।
दिल्ली सरकार की इस योजना का उद्देश्य सर्दियों में बढ़ते प्रदूषण को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित करना है। अधिकारियों को नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वाहन मालिक अपने वाहन का उत्सर्जन मानक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी आरसी या वाहन पोर्टल से जांच सकते हैं। वहीं, पीयूसी प्रमाणपत्र की वैधता भी ऑनलाइन देखी जा सकती है। जिन लोगों का प्रमाणपत्र समाप्त हो गया है, उन्हें अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र से नया प्रमाणपत्र बनवाना चाहिए।
दिल्ली यातायात पुलिस ने भी वाहन चालकों को यात्रा से पहले नियमों की जानकारी लेने की सलाह दी है। खासकर एनसीआर से राजधानी आने वाले लोगों को अपने वाहन की श्रेणी और जरूरी दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, दिल्ली में 1 नवंबर से लागू प्रदूषण नियंत्रण उपायों का असर वाहन चालकों, कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और निर्माण गतिविधियों पर पड़ेगा। सरकार को उम्मीद है कि पुराने प्रदूषणकारी वाहनों की आवाजाही सीमित करने, पीयूसी नियमों का पालन कराने और निजी वाहनों का इस्तेमाल घटाने से राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
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