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ईरान से फिर युद्ध की आशंका यायर गोलान ने नेतन्याहू पर साधा निशाना
Ratna Netam
1 Nov 2026 4:35 PM IST

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यरुशलम : 1 नवंबर 2026। इजरायल और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव की आशंका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इजरायल की डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व सैन्य अधिकारी यायर गोलान ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ नए संघर्ष की संभावना लगातार बढ़ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनकी सरकार देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। गोलान ने नेतन्याहू और उनकी सरकार के प्रमुख मंत्रियों को इजरायल के लिए खतरा बताते हुए जल्द से जल्द वैकल्पिक सरकार के गठन की मांग की है। उनके इस बयान ने इजरायल में जारी राजनीतिक अनिश्चितता और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच नई बहस छेड़ दी है।रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में यायर गोलान ने कहा कि इजरायल बार-बार ईरान के साथ सैन्य संघर्ष की स्थिति में पहुंच रहा है। उनके अनुसार, यह प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सुरक्षा नीतियों की विफलता को दर्शाता है। गोलान ने दावा किया कि देश को ऐसी परिस्थितियों में पहुंचा दिया गया है, जहां नए सैन्य अभियान की आशंका बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी संभावित युद्ध से पहले राजनीतिक नेतृत्व की विश्वसनीयता और रणनीतिक तैयारियों का गंभीर मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
गोलान ने नेतन्याहू की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास नए युद्ध का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक जनविश्वास, नैतिक वैधता और बुनियादी क्षमता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक हितों से जोड़ रही है। गोलान का कहना है कि देश की सुरक्षा को किसी भी नेता के राजनीतिक भविष्य से ऊपर रखा जाना चाहिए।डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष ने विपक्ष के अन्य प्रमुख नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गादी आइजेनकोट, अविगडोर लिबरमैन, नफ्ताली बेनेट, यायर लापिड और उनके पास इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक अनुभव है। उन्होंने दावा किया कि ये नेता रक्षा प्रतिष्ठान की कार्यप्रणाली को अच्छी तरह समझते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने को तैयार हैं।गोलान ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के अलावा रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं का महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर बने रहना देश की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। हालांकि, यह गोलान का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी आधिकारिक सुरक्षा निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इजरायल में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब हालिया संसदीय चुनावों के बाद नई सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। प्रारंभिक चुनावी आंकड़ों के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को 120 सदस्यीय संसद नेसेट में 53 सीटें मिलीं, जबकि यहूदी विपक्षी दलों को 48 और अरब राजनीतिक दलों को 19 सीटें मिलीं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा जारी है।यायर गोलान ने विपक्षी दलों से मतभेद दूर कर वैकल्पिक सरकार बनाने की अपील की है। उनका मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो सुरक्षा संबंधी फैसलों को स्पष्ट रणनीति और व्यापक राजनीतिक समर्थन के आधार पर ले सके। उन्होंने अरब राजनीतिक दलों के समर्थन से सरकार बनाने की संभावना का भी समर्थन किया है। हालांकि, विपक्ष के सभी नेताओं के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी है।
इस बीच इजरायल और ईरान के बीच संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों ने भी चिंताएं बढ़ाई हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में इजरायली मीडिया ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और इजरायली सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर के बीच एक संभावित सैन्य अभियान को लेकर मतभेद सामने आए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सेना प्रमुख ने किसी भी संवेदनशील कार्रवाई से पहले विस्तृत चर्चा और औपचारिक स्वीकृति की आवश्यकता जताई थी। हालांकि, नेतन्याहू ने इस तरह के टकराव की खबरों से इनकार किया था।इससे पहले 14 अक्टूबर को नेतन्याहू ने कहा था कि वह संसदीय चुनाव से पहले ईरान पर कोई पूर्व-नियोजित हमला करने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान या उसके सहयोगी इजरायल पर हमला करते हैं, तो इजरायल कड़ी जवाबी कार्रवाई करेगा। इस बयान से स्पष्ट होता है कि संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।
ईरान और इजरायल के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व में किसी भी नए सैन्य संघर्ष से क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवाद और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्कों के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है। ईरान ने प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों से जुड़ी शर्तें रखी हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत जारी रहने की बात कही है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख भी दोहराया है।यायर गोलान के ताजा बयान ने इजरायल की घरेलू राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। फिलहाल ईरान के खिलाफ किसी नए इजरायली सैन्य अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में नई सरकार के गठन की कोशिशें, अमेरिका-ईरान कूटनीतिक वार्ता और इजरायली सुरक्षा प्रतिष्ठान के फैसले क्षेत्रीय परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं।
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