New Delhi नई दिल्ली : बाल अपहरण मामले में गिरफ्तार तीन लोगों को जमानत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करने वाले सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार की ढुलमुल रवैये की आलोचना की है।
आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर कोर्ट का रुख काफी नरम है। यही वजह है कि कई अपराधी जमानत मिलने के बाद फरार हो जाते हैं। ऐसे अपराधी समाज के लिए काफी खतरनाक होते हैं। ऐसे अपराधियों को जमानत देते समय कम से कम न्यूनतम शर्तें तो लगाई ही जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पारदीवाला और महादेवन की पीठ ने कहा कि जब कई बार जमानत दी जाती है तो पुलिस अपराधियों का पता नहीं लगा पाती।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा कि माता-पिता को भी अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति काफी सतर्क रहना चाहिए और हमेशा पुलिस और सरकारी अधिकारियों को दोष नहीं देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जब अपहरणकर्ता ऐसे बच्चे का अपहरण करते हैं तो माता-पिता को जो दर्द और पीड़ा होती है, वह बच्चे की मौत से भी ज्यादा भयावह होती है।
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