सेना को मिलेंगे अनुभवी जवान, अग्निवीरों के सेवा विस्तार पर त्रिपाठी का बड़ा बयान
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का अवसर देने के फैसले का पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने स्वागत किया है। उन्होंने इस निर्णय को अग्निवीरों, उनके परिवारों और भारतीय सशस्त्र बलों के लिए बड़ी राहत बताया है। त्रिपाठी के अनुसार, पहले से प्रशिक्षित जवानों को दो वर्ष और सेवा में बनाए रखने से सेना की कार्यक्षमता बढ़ेगी और जवानों को भी अपने अनुभव तथा कौशल का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस फैसले को सभी पक्षों के लिए लाभकारी बताते हुए अग्निवीरों के लिए दिवाली का तोहफा करार दिया।पूर्व नौसेना प्रमुख ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित छठे इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD) के दौरान समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में व्यस्त रहने के कारण वह सरकार के फैसले का पूरा विवरण नहीं पढ़ पाए थे, लेकिन उन्हें जानकारी मिली थी कि चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों में से शेष 75 प्रतिशत को दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा।त्रिपाठी ने कहा कि प्रशिक्षित जवानों को दो वर्ष और सशस्त्र बलों में बनाए रखना बेहद सकारात्मक कदम है। इससे सेना को अनुभवी मानव संसाधन उपलब्ध रहेगा। साथ ही जवानों और उनके परिवारों को आर्थिक तथा पेशेवर स्तर पर अतिरिक्त अवसर मिलेंगे। उनका मानना है कि यह फैसला सेना और अग्निवीरों, दोनों के हित में है।
दरअसल, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को अग्निपथ योजना में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत चार साल की प्रारंभिक सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से पहले की तरह योग्यता के आधार पर 25 प्रतिशत को नियमित सेवा में शामिल किया जाएगा। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी इच्छा के अनुसार दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि का विकल्प मिलेगा। इसके बाद इच्छुक अग्निवीर निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करके नियमित सैनिक बनने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे।इस फैसले के बाद संबंधित अग्निवीरों की कुल सेवा अवधि चार वर्ष से बढ़कर छह वर्ष तक हो सकेगी। हालांकि नियमित सेवा में शामिल होना अपने आप सुनिश्चित नहीं होगा। इसके लिए अग्निवीरों की सहमति, योग्यता और निर्धारित चयन प्रक्रिया में सफल होना आवश्यक रहेगा।केंद्र सरकार के इस फैसले की जानकारी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों के दौरान अग्निवीरों के प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया गया। तीनों सेनाओं से उनके प्रशिक्षण, अनुशासन, शारीरिक क्षमता, तकनीकी कौशल और कार्य प्रदर्शन के संबंध में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।इसी मूल्यांकन के आधार पर सरकार ने अग्निवीरों को अतिरिक्त सेवा का अवसर देने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों में प्रशिक्षित जवानों की उपलब्धता बनाए रखना और युवाओं को बेहतर करियर संभावनाएं प्रदान करना है।
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में की गई थी। इस योजना के तहत भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं की भर्ती चार वर्ष की निर्धारित अवधि के लिए की जाती है। प्रारंभिक व्यवस्था में चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान था। बाकी 75 प्रतिशत जवानों को सेवा से बाहर होना पड़ता था।इस व्यवस्था को लेकर शुरुआत से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही। कई संगठनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने चार वर्ष की सेवा अवधि को कम बताते हुए इसमें बदलाव की आवश्यकता जताई थी। उनका तर्क था कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले जवानों की सेवाओं का अधिक समय तक उपयोग किया जाना चाहिए।अब सरकार के नए निर्णय से ऐसे अग्निवीरों को अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जो पहले चार वर्ष की सेवा के बाद नियमित चयन में जगह नहीं बना पाते थे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दूसरी सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को पहले के मुकाबले अधिक पारिश्रमिक मिलेगा। इसके अलावा उनकी सेवा निधि में वृद्धि तथा वरिष्ठता से संबंधित लाभ देने का भी प्रावधान किया गया है। इससे अग्निवीरों के आर्थिक हितों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।पूर्व नौसेना प्रमुख त्रिपाठी की प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सैन्य सेवाओं में प्रशिक्षण और अनुभव की बड़ी भूमिका होती है। किसी भी जवान को आधुनिक हथियार प्रणालियों, संचार उपकरणों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और परिचालन गतिविधियों के अनुरूप तैयार करने में समय लगता है।
विशेष रूप से नौसेना और वायुसेना जैसी तकनीक आधारित सेवाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सेवा अवधि बढ़ाने से जवानों को अपनी विशेषज्ञता विकसित करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। इससे सैन्य इकाइयों में प्रशिक्षण पर किए गए निवेश का अधिक लाभ मिलने की संभावना है।सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अग्निपथ योजना के अंतर्गत भर्ती हुए पहले बैच के जवान अपनी चार वर्ष की प्रारंभिक सेवा अवधि पूरी करने के करीब पहुंच चुके हैं। इससे पहले बड़ी संख्या में अग्निवीरों के इस वर्ष सेवा से बाहर होने की संभावना थी। नई व्यवस्था के कारण पात्र और इच्छुक जवान अब अतिरिक्त दो वर्षों तक सेवा जारी रख सकेंगे।हालांकि रक्षा क्षेत्र के कुछ पूर्व अधिकारियों ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए कहा है कि ऐसी व्यवस्था पहले लागू की जाती तो बेहतर होता। वहीं अन्य विशेषज्ञ इसे सैन्य भर्ती प्रणाली में प्राप्त अनुभव और सुझावों के आधार पर किया गया सकारात्मक सुधार मान रहे हैं।पूर्व नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने इस निर्णय के साथ भारतीय नौसेना की व्यापक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और मानवीय सहायता अभियानों के महत्व को रेखांकित किया। इस दौरान भारतीय नौसेना द्वारा 20 ईरानी चालक दल के सदस्यों को बचाए जाने के अभियान का भी उल्लेख हुआ।कुल मिलाकर अग्निवीरों को दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा देने का फैसला देश की सैन्य भर्ती व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे युवाओं को अधिक समय तक देश की सेवा करने, बेहतर प्रशिक्षण हासिल करने और नियमित सैन्य सेवा में चयनित होने का एक और अवसर मिलेगा।पूर्व नौसेना प्रमुख त्रिपाठी का मानना है कि इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि सशस्त्र बलों को पहले से प्रशिक्षित और अनुभवी जवान दो वर्ष अतिरिक्त मिल सकेंगे। इससे सैन्य तैयारियों और संगठनात्मक कार्यक्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।