नई दिल्ली: देश की राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित इलाकों में शामिल लुटियंस दिल्ली में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। महा स्वच्छता अभियान के बीच नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के कुछ सार्वजनिक शौचालयों में कथित तौर पर अव्यवस्था, शराब पीने, जुए और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों की शिकायतें सामने आई हैं। इससे राजधानी के वीआईपी इलाके की साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

लुटियंस दिल्ली में सरकारी कार्यालयों, प्रमुख इमारतों और बड़ी संख्या में आने-जाने वाले लोगों के कारण सार्वजनिक सुविधाओं का महत्व काफी अधिक है। ऐसे में सार्वजनिक शौचालयों की खराब स्थिति और वहां अवैध गतिविधियों की शिकायतें प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।
स्थानीय लोगों और आसपास के दुकानदारों का कहना है कि कुछ सार्वजनिक शौचालयों के आसपास अवांछित गतिविधियां देखने को मिलती हैं। आरोप है कि कई जगहों पर शौचालयों का इस्तेमाल उनकी मूल सुविधा के बजाय अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इससे आम लोगों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्वच्छता अभियान के तहत नगर निकाय लगातार सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाने का दावा करते रहे हैं। NDMC की ओर से भी समय-समय पर सफाई अभियान और निरीक्षण अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर निगरानी की कमी और रखरखाव की समस्या सामने आने से अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
सार्वजनिक शौचालयों की सबसे बड़ी चुनौती नियमित सफाई, सुरक्षा और उचित रखरखाव की होती है। यदि इन जगहों पर निगरानी मजबूत न हो तो गंदगी, अवैध कब्जे और असामाजिक गतिविधियों की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सफाई अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।
लोगों ने मांग की है कि NDMC क्षेत्र के सभी सार्वजनिक शौचालयों की नियमित जांच कराई जाए। जहां भी अव्यवस्था या अवैध गतिविधियां मिलें, वहां तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा शौचालयों में सुरक्षा व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी और सीसीटीवी निगरानी जैसी सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
लुटियंस दिल्ली देश के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आता है। यहां की व्यवस्था सीधे राजधानी की छवि से जुड़ी होती है। ऐसे में सार्वजनिक सुविधाओं की खराब स्थिति प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है। फिलहाल इस मामले के बाद सार्वजनिक शौचालयों की निगरानी और रखरखाव को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि NDMC की ओर से इन शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और स्वच्छता अभियान को जमीन पर कितना प्रभावी बनाया जा सकता है।
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