नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता एक बार फिर खराब होने लगी है। बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पिछली सरकार पर प्रदूषण नियंत्रण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में दिल्ली की हवा लगातार प्रदूषित होती गई, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
पिछली सरकार पर पर्यावरण मंत्री का हमला
बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण लंबे समय से गंभीर समस्या बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार प्रदूषण की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय दूसरे राज्यों को दोष देती रही।सिरसा ने कहा, "दिल्ली में प्रदूषण को लेकर बात करें तो पिछले 10-12 सालों में यहां की हवा बहुत ज्यादा प्रदूषित हो गई है। पिछली सरकार सिर्फ बहाने बनाती रही—कभी पंजाब को दोष दिया, तो कभी उत्तर प्रदेश, हरियाणा या राजस्थान को—लेकिन इन 12 सालों में वे कोई भी ठोस कदम उठाने में नाकाम रहे।"उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपायों पर काम कर रही है। हालांकि, पिछली सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता को लेकर उनका बयान राजनीतिक आरोप है।
दिल्ली का AQI पहुंचा खराब श्रेणी में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 179 दर्ज किया गया था, जो मध्यम श्रेणी में आता है।बुधवार दोपहर दो बजे तक यह बढ़कर 244 पहुंच गया। इसके साथ ही दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई।वायु गुणवत्ता में अचानक आई गिरावट के बाद CAQM की उपसमिति ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में GRAP का पहला चरण तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया। मौसम संबंधी पूर्वानुमानों में आने वाले दिनों में भी हवा की गुणवत्ता खराब रहने की आशंका जताई गई है।
GRAP-1 लागू होने से क्या बदल जाएगा?
GRAP का पहला चरण तब लागू किया जाता है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 201 से 300 के बीच पहुंचता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदूषण को और बढ़ने से रोकना है।इस चरण के तहत सड़कों की मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे उपायों को सख्ती से लागू किया जाएगा।वाहनों से निकलने वाले धुएं की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा निर्माण सामग्री और मलबे के उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।फिलहाल GRAP-1 लागू होने से स्कूलों और कार्यालयों को बंद करने का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।
प्रदूषण रोकने के लिए 11 सूत्रीय कार्ययोजना
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए 11 सूत्रीय कार्ययोजना पर काम कर रही है।उन्होंने कहा कि सरकार धूल प्रदूषण कम करने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों की पहचान करने पर विशेष ध्यान दे रही है।सिरसा के अनुसार, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार मिलकर वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास कर रही हैं। उन्होंने जनता की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
सर्दियों में क्यों बढ़ता है दिल्ली का प्रदूषण?
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण बढ़ने की समस्या देखी जाती है। इस दौरान हवा की गति धीमी होने और तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण की निचली परतों में जमा होने लगते हैं।वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और अन्य स्थानीय स्रोत भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल अस्थायी प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए परिवहन, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार सुधार आवश्यक है।
दिल्ली सरकार ने जनता से मांगा सहयोग
पर्यावरण मंत्री ने प्रदूषण के खिलाफ अभियान में लोगों से सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठा रही है, लेकिन प्रदूषण रोकने के लिए नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में GRAP-1 के प्रावधान लागू हो चुके हैं। संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर निगरानी बढ़ानी होगी।आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होने और AQI के और बढ़ने की स्थिति में आयोग अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकता है।