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पारंपरिक कलाकारों के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बड़ा संदेश
Ratna Netam
21 Oct 2026 6:42 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को देश के पारंपरिक और ग्रामीण कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की पारंपरिक कलाएं देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन कलाओं से जुड़े कलाकारों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से दूरदराज के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले कलाकारों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
पारंपरिक कलाकारों को मिले आधुनिक प्रशिक्षण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि देश की पारंपरिक कलाओं को संरक्षित रखने के साथ बदलते समय के अनुसार विकसित करना भी जरूरी है।उन्होंने सोहराई, मधुबनी, गोंड और सौरा जैसी लोक एवं जनजातीय चित्रकला परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कलाओं को देश और विदेश में पहचान मिल रही है।हालांकि, इनसे जुड़े अनेक कलाकार आज भी छोटे गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहते हैं। संसाधनों और प्रशिक्षण की कमी के कारण उन्हें बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता।राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कलाकारों को नई तकनीकों और समकालीन कला की विधाओं का प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इससे वे अपनी मौलिक पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक कला जगत में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
कला हमारी संस्कृति का दर्पण है: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि कला केवल कैनवास पर बनाई गई तस्वीरों या पत्थरों से तराशी गई मूर्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की संस्कृति और पहचान का प्रतिबिंब है।उन्होंने कहा कि कला के माध्यम से देश के इतिहास, वर्तमान जीवन और भविष्य की आकांक्षाओं को समझा जा सकता है।राष्ट्रपति ने भारतीय कला की विविधता की सराहना करते हुए कहा कि देश के महानगरों से लेकर छोटे शहरों और पूर्वोत्तर राज्यों के दूरस्थ क्षेत्रों तक कलाकार अपनी विशिष्ट प्रतिभा से भारतीय संस्कृति को समृद्ध कर रहे हैं।
कलाकारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना जरूरी
राष्ट्रपति ने कहा कि कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल प्रतिभा होना पर्याप्त नहीं है। कलाकारों को आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधाएं और अपनी कलाकृतियां बेचने के बेहतर अवसर भी मिलने चाहिए।उन्होंने कला संग्रहकर्ताओं और खरीदारों से कलाकारों को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि ललित कला अकादमी और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय कलाकारों की कलाकृतियों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के प्रयास कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि इन पहलों से कलाकारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिला सम्मान
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए।इसके अलावा उन्होंने तीसरे प्रिंट बिएनाले इंडिया 2026 के ग्रैंड प्राइज विजेताओं और विशेष उल्लेख प्राप्त कलाकारों को भी सम्मानित किया।राष्ट्रपति ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन भारत की कलात्मक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक रचनात्मकता का उत्सव हैं।समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कला को स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचाने की अपील
राष्ट्रपति ने कहा कि कला केवल संग्रहालयों और कला दीर्घाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचाना जरूरी है।उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को छोटी उम्र से ही भारतीय कला और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए।इससे नई पीढ़ी में रचनात्मकता विकसित होगी और पारंपरिक कलाओं के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।राष्ट्रपति ने सभी संबंधित संस्थाओं से युवा और उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा विकसित करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करने का आग्रह किया।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिले भारतीय कला को पहचान
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ग्रामीण और जनजातीय कलाकारों की प्रतिभा को बड़े मंचों तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।उन्होंने कलाकारों को नई तकनीक सीखने, विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने और अपनी रचनात्मक क्षमताओं का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया।राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं तथा कला जगत से जुड़े लोगों के सहयोग से भारतीय पारंपरिक कलाओं को और अधिक पहचान मिलेगी।उन्होंने कहा कि कला और कलाकारों के हित में किए जा रहे प्रयास प्रभावी होने चाहिए, ताकि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहे।
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