नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को कथित तौर पर करीब सात करोड़ रुपये का चूना लगाने के मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक से करोड़ों रुपये की रकम हासिल करने और बाद में उसका दुरुपयोग करने का आरोप है। लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने आरोपी के बारे में जानकारी जुटाने के बाद उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस पूरे नेटवर्क और रकम के लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक मामला बैंक के साथ सुनियोजित तरीके से की गई कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी ने बैंकिंग प्रक्रिया का फायदा उठाने के लिए कई दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। बाद में जांच के दौरान इनमें से कई दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल खड़े हुए। बैंक को जब दस्तावेजों और लेन-देन में गड़बड़ी का पता चला तो मामले की आंतरिक जांच शुरू हुई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई और पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
आरोप है कि युवक ने बैंक को ऐसे दस्तावेज उपलब्ध कराए जिनके आधार पर उसकी वित्तीय स्थिति और अन्य जरूरी जानकारियों को वास्तविक दिखाया गया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक से बड़ी रकम हासिल की गई। जांच में जब दस्तावेजों का संबंधित विभागों और रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलनी शुरू हुईं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेज आरोपी ने खुद तैयार किए थे या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था। इसके अलावा दस्तावेज तैयार करने, बैंक में जमा कराने और रकम हासिल करने की पूरी प्रक्रिया में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
मामले में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी रकम जारी किए जाने से पहले दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई थी और सत्यापन की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे पकड़ में नहीं आई। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत के संकेत मिलते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
सात करोड़ रुपये की रकम का पता लगाने में जुटी पुलिस
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित तौर पर हड़पी गई करीब सात करोड़ रुपये की रकम है। पुलिस यह पता लगा रही है कि पैसा किन बैंक खातों में भेजा गया और बाद में उसका इस्तेमाल कहां किया गया। इसके लिए संबंधित बैंक खातों के लेन-देन की जानकारी खंगाली जा रही है।
पुलिस को आशंका है कि रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसके मूल स्रोत और अंतिम लाभार्थियों को छिपाने की कोशिश की गई हो सकती है। ऐसे में जांच टीम बैंक स्टेटमेंट और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। जिन खातों में संदिग्ध लेन-देन सामने आएगा, उनसे जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे यह जानने का प्रयास कर रही है कि बैंक से इतनी बड़ी रकम हासिल करने की योजना कब और कैसे बनाई गई। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और उन्हें तैयार करने में किसने मदद की।
ऐसे खुला धोखाधड़ी का मामला
बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मामले में भी कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद दस्तावेजों की दोबारा जांच की गई। जांच के दौरान रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर बैंक अधिकारियों का शक गहराया।
इसके बाद मामले से जुड़े दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए गए। पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड, आरोपी से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन का मिलान किया। जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाए गए और उसकी तलाश शुरू की गई।
आरोपी की गतिविधियों और संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किए जाने और जरूरत पड़ने पर पूछताछ के लिए रिमांड मांगने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
और भी आरोपियों की भूमिका की जांच
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी बैंक धोखाधड़ी को आरोपी ने अकेले अंजाम दिया या उसके साथ अन्य लोग भी शामिल थे। करोड़ों रुपये के वित्तीय अपराधों में कई बार फर्जी दस्तावेज बनाने वाले, बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले और रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने वाले लोगों का नेटवर्क सामने आता है।
इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच टीम आरोपी के संपर्क में रहे लोगों और उससे जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है। फोन और डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धोखाधड़ी से पहले और बाद में आरोपी किन लोगों के लगातार संपर्क में था।
इसके साथ ही जिन खातों में रकम पहुंची, उनके खाताधारकों की भूमिका भी जांची जा सकती है। यदि किसी खाते का इस्तेमाल केवल रकम को इधर से उधर करने के लिए किया गया है तो उसके संचालक से पूछताछ की जा सकती है।
बैंकिंग सिस्टम की कमियों की भी होगी जांच
करीब सात करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी सामने आने के बाद बैंक की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इतनी बड़ी रकम जारी करने के लिए सामान्य तौर पर कई स्तर पर दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाती है। ऐसे में कथित फर्जी दस्तावेज इन प्रक्रियाओं से कैसे निकल गए, यह जांच का अहम हिस्सा है।
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन किया गया था या नहीं। अगर सत्यापन किया गया था तो फर्जीवाड़ा उस समय सामने क्यों नहीं आया। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल बाहरी धोखाधड़ी का है या बैंकिंग प्रक्रिया के भीतर किसी स्तर पर लापरवाही भी हुई।
आरोपी से पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज
गिरफ्तारी को जांच में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ के बाद फर्जी दस्तावेजों के स्रोत, रकम के इस्तेमाल और संभावित सहयोगियों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
पुलिस का फोकस अब कथित तौर पर हड़पी गई रकम की बरामदगी पर भी है। यदि रकम से कोई संपत्ति खरीदी गई है या पैसा दूसरे खातों में मौजूद है तो कानून के मुताबिक उसे जब्त या फ्रीज करने की कार्रवाई की जा सकती है।
मामले की जांच अभी जारी है। आरोपी से पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही धोखाधड़ी की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही यह भी सामने आएगा कि कथित सात करोड़ रुपये की रकम आखिर कहां गई और इस पूरे खेल में आरोपी के अलावा कितने लोग शामिल थे।
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