ACB का शिकंजा, जेल अधिकारी और वकील गिरफ्तार

Update: 2026-07-16 15:35 GMT

नई दिल्ली: दिल्ली की रोहिणी और तिहाड़ जेलों में चल रहे कथित रिश्वतखोरी और जबरन वसूली के बड़े नेटवर्क का दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने खुलासा किया है। इस मामले में एसीबी ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या 11 हो गई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में जेल अधिकारी, वकील और निजी व्यक्ति शामिल हैं।

एसीबी के अनुसार, यह गिरोह जेल के अंदर बंद विचाराधीन कैदियों और उनके परिवारों से पैसे वसूलने का काम करता था। आरोप है कि कैदियों को सुरक्षा दिलाने, जेल के अंदर सुविधाएं उपलब्ध कराने और परेशानियों से बचाने के नाम पर उनसे रिश्वत मांगी जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में जेल अधिकारियों के साथ कुछ वकील और बाहरी लोग भी शामिल थे।

एसीबी ने बृहस्पतिवार को रोहिणी जेल के एक सहायक अधीक्षक, दो अन्य जेल अधिकारियों और एक वकील समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। इससे पहले फरवरी के दूसरे सप्ताह में एसीबी ने इसी सिंडिकेट के छह लोगों को पकड़ा था। इनमें चार जेल अधिकारी, एक वकील और एक निजी व्यक्ति शामिल था।

मामले का खुलासा जनवरी में मिली एक शिकायत के बाद हुआ। एसीबी को सूचना मिली थी कि तिहाड़ और रोहिणी जेलों में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो कैदियों और उनके परिजनों से जबरन पैसे की मांग कर रहा है। 9 फरवरी को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रोहिणी जेल में बंद एक व्यक्ति के पिता और भाई की सुरक्षा तथा जेल में सुविधाएं देने के बदले लगातार रुपये मांगे जा रहे थे। शिकायतकर्ता को धमकाने की बात भी सामने आई थी।

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने जांच शुरू की और शुरुआती कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें रोहिणी जेल के वार्डर दिनेश डबास, पंकज कुमार और रवि कुमार, तिहाड़ जेल के हेड वार्डर जोगेंद्र, वकील मनीष और निजी व्यक्ति आशीष राणा शामिल थे।

गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की जांच की। जांच में सामने आया कि उगाही की रकम को सीधे किसी एक व्यक्ति तक पहुंचाने के बजाय कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था। इसके बाद पैसे निकालकर गिरोह के सदस्यों के बीच बांट दिए जाते थे।

जांच में मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर एसीबी ने पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें रोहिणी जेल के सहायक अधीक्षक सुनील कुमार, हेड वार्डर योगेश, वार्डर जगबीर, वकील हरेंद्र बंसल और निजी व्यक्ति विप्लव खारी शामिल हैं।

एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह का काम करने का तरीका काफी सुनियोजित था। जेल में प्रभाव रखने वाले कुछ लोग छोटे अपराधियों और विचाराधीन कैदियों को डराते थे। उन्हें जेल में परेशानी, मारपीट या अन्य नुकसान का भय दिखाकर सुविधाएं दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके बदले उनके परिवारों से पैसे मंगवाए जाते थे।

जांच में यह भी पता चला कि कुछ कैदियों के परिजनों को विशेष बैंक खाते और मोबाइल नंबर दिए जाते थे, जिन पर पैसे भेजे जाते थे। बाद में इन पैसों को अलग-अलग माध्यमों से निकालकर गिरोह के सभी सदस्यों में बांट दिया जाता था।

एसीबी अब इस पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और अब तक कितनी रकम की वसूली की गई है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

इस कार्रवाई के बाद दिल्ली की जेल व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। एसीबी का कहना है कि जेलों के अंदर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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