दिल्ली-एनसीआर

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नया कदम, विक्रम-1 रॉकेट लॉन्च के लिए तैयार

Ratna Netam
16 July 2026 8:59 PM IST
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नया कदम, विक्रम-1 रॉकेट लॉन्च के लिए तैयार
x

New Delhi नई दिल्ली : भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पल आने वाला है। देश की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने घोषणा की है कि वह 18 जुलाई को अपने विक्रम-1 ऑर्बिटल रॉकेट की पहली टेस्ट फ्लाइट का प्रयास करेगी। यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (एसडीएससी-शार) के पहले लॉन्च पैड से किया जाएगा।

इस मिशन को भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार कोई निजी भारतीय कंपनी अपने द्वारा पूरी तरह डिजाइन और विकसित किए गए ऑर्बिटल श्रेणी के रॉकेट को भारतीय धरती से लॉन्च करने जा रही है। इससे देश के निजी अंतरिक्ष उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि विक्रम-1 रॉकेट की यह पहली टेस्ट फ्लाइट कई तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से की जा रही है। इस मिशन के दौरान रॉकेट के प्रदर्शन, उड़ान प्रणाली, इंजन क्षमता और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा।

विक्रम-1 अपने साथ कई टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड लेकर जाएगा। इनमें ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट एयरोस्पेस के अपने स्कोप (SCOPE) पेलोड शामिल हैं। इन पेलोड के जरिए अंतरिक्ष में विभिन्न तकनीकी प्रयोग किए जाएंगे और भविष्य के मिशनों के लिए जरूरी डेटा जुटाया जाएगा।

स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी अंतरिक्ष कंपनियों में से एक है, जिसने छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया था। कंपनी का लक्ष्य कम लागत और आधुनिक तकनीक के जरिए छोटे उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में अपनी जगह बनाना है।

विक्रम-1 रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह रॉकेट छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

भारत में अब तक अंतरिक्ष मिशनों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) संभालता रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की नीति के बाद कई स्टार्टअप इस क्षेत्र में आगे आए हैं।

स्काईरूट का यह मिशन भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है। सफल परीक्षण के बाद कंपनी भविष्य में व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएं देने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

अंतरिक्ष विशेषज्ञों के अनुसार, निजी कंपनियों के आने से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वैश्विक स्तर पर देश की भागीदारी मजबूत होगी। छोटे उपग्रहों की बढ़ती मांग के बीच ऐसे रॉकेटों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

18 जुलाई को होने वाली यह टेस्ट फ्लाइट सिर्फ स्काईरूट एयरोस्पेस के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अगर मिशन सफल रहता है तो यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के नए अवसर खोल सकता है और देश को वैश्विक स्पेस मार्केट में और मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगा।

Next Story