दिल्ली : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो को अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस मिशन के तहत प्रस्तावित मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के बीच इस प्रस्ताव को अहम माना जा रहा है। अगर भारत इस पहल में शामिल होता है तो चंद्रमा पर भविष्य के वैज्ञानिक अभियानों और मानव अंतरिक्ष उड़ानों में दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत हो सकती है।
अमेरिकी दूतावास के अनुसार, नासा ने आर्टेमिस समझौते के तहत भारत-अमेरिका सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए इसरो को मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इसके साथ ही दोनों पक्ष खुले वैज्ञानिक डेटा साझा करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष के नागरिक उपयोग और उसके शांतिपूर्ण अन्वेषण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
नासा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास भविष्य के मानव अभियानों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। मून बेस की अवधारणा का मकसद चंद्रमा पर लंबे समय तक वैज्ञानिक गतिविधियों को संभव बनाना है। इसके जरिए चंद्रमा की सतह और वहां मौजूद संसाधनों का अध्ययन, नई तकनीकों का परीक्षण और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी की जा सकेगी। चंद्रमा को मंगल ग्रह पर भविष्य में होने वाले मानव मिशनों की तैयारी के लिए भी महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
भारत पहले ही आर्टेमिस समझौते का हिस्सा बन चुका है। 21 जून 2023 को भारत इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वां देश बना था। आर्टेमिस समझौता अंतरिक्ष अन्वेषण में देशों के बीच सहयोग, पारदर्शिता, वैज्ञानिक जानकारी साझा करने और शांतिपूर्ण उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए दिशा-निर्देश उपलब्ध कराता है। भारत की भागीदारी से दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है।
नासा और इसरो के बीच ताजा बातचीत भारत-अमेरिका सिविल स्पेस ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की नौवीं बैठक के दौरान हुई। इस बैठक की मेजबानी भारत ने 5 और 6 अगस्त को बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय में की थी। बैठक में दोनों देशों ने नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। भविष्य में विज्ञान, मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
आर्टेमिस कार्यक्रम नासा की सबसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष पहलों में से एक है। इसका व्यापक उद्देश्य इंसानों को लंबे अंतराल के बाद फिर से चंद्रमा पर भेजना, वहां स्थायी गतिविधियों के लिए आधार तैयार करना और आगे मंगल ग्रह पर मानव मिशन की नींव रखना है। कार्यक्रम के अलग-अलग चरणों के जरिए चंद्रमा की कक्षा, सतह और वहां मौजूद परिस्थितियों का अध्ययन किया जा रहा है।
आर्टेमिस-1 इस कार्यक्रम का पहला बड़ा चरण था। नवंबर 2022 में लॉन्च किए गए इस मानव रहित मिशन के दौरान ओरियन अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के आसपास उड़ान भरी और पृथ्वी पर वापस लौटकर अंतरिक्ष यान की क्षमताओं का परीक्षण किया। इसके बाद आर्टेमिस-2 के जरिए मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़े परीक्षणों को आगे बढ़ाया गया।
आगे के मिशनों में चंद्रमा की कक्षा में डॉकिंग और अन्य तकनीकी परीक्षणों के साथ चंद्र सतह पर मानव लैंडिंग की योजनाएं शामिल हैं। खासतौर पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां पानी की बर्फ मौजूद होने की संभावना के कारण भविष्य के मानव अभियानों के लिए इस क्षेत्र का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए नासा का यह निमंत्रण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसरो मानव अंतरिक्ष उड़ान और चंद्र अन्वेषण के क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है। चंद्रयान अभियानों से भारत ने चंद्रमा के अध्ययन में अपनी मजबूत तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है। वहीं गगनयान कार्यक्रम के जरिए भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने की दिशा में काम कर रहा है।
मून बेस कार्यक्रम में भारत की संभावित भागीदारी से वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई तकनीकों, वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतरिक्ष अभियानों में सहयोग का अवसर मिल सकता है। इससे भारत-अमेरिका की अंतरिक्ष साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इसरो और नासा के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि भारत इस प्रस्ताव के तहत किस स्तर पर और किन परियोजनाओं में भागीदारी करेगा।
Tags: